हसनपुर ब्लाक के चार गांवों के लोगों ने बृहस्पतिवार को अपनी जिंदगी में पहली बार बिजली का बल्ब जलते देखा। उनकी आंखों के चिराग भी जगमगा उठे। भीषण गर्मी और उमस में नये खरीदे पंख चल रहे थे। उनके चेहरों पर सुकून की इबारत साफ पढ़ी जा सकती थी।
बच्चों को सुकून था कि अब वे भी तेल की कुप्पी की जगह बिजली की रोशनी में अपनी पढ़ाई कर सकेंगे। वे खुशी से नाचने लगे। बुजुर्ग गंगासरन सिंह ने बताया कि बिजली मिलने से ग्रामीणों को पहली बार आजादी का अहसास हुआ है। बोले- हमारी तो जिंदगी कट गई, लेकिन बच्चों को बिजली का फायदा मिलेगा।
देश की आजादी के 68 साल बाद क्षेत्र के चार गांवों में बिजली की रोशनी पहुंची तो हरेक ग्रामीण का चेहरा खिल गया। बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी गदगद हो गए। रोशनी पड़ते ही अंधेरे और नीम रोशनी की आदी हो चुकी बुजुर्गों की आंखें की आंखें तेज रोशनी चुंधिया गईं। युवाओं के दिल बल्लियों उछलने लगे। बुजुर्गों की जुबां से बस यही बात निकली कि हमार तो जिंदगानी कट गई, अब बचवा को फायदा मिलेगा।
हसनपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव रुद्रपुर, डाकेवाली, मल्लवाली डगरौली, फूलपुर बीझलपुर में आजादी के बाद भी बिजली नहीं आई थी। गांव वालों को उम्मीद भी नहीं थी। किसी नेता-जनप्रतिनिधि को इसकी फिक्र नहीं थी। केंद्र सरकार की हर गांव को रोशन करने की योजना के तहत इस गांव का नंबर आया तब इसकी भी सुध ली गई। चारों गांवों में विद्युतीकरण के बाद आपूर्ति शुरू कर दी गई। इससे लोगों में खुशी छा गई। ग्रामीण जयपाल सिंह व भोला सिंह ने बताया कि लगातार प्रयास के बाद गांव को बिजली नसीब हुई है। बिजली के बिना बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते थे। लेकिन अब बल्ब के उजाले में बच्चे पढ़ाई करेंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा। भीषण गर्मी में भी ग्रामीण हाथ के पंखों के सहारे रहते थे। लेकिन अब लोगों ने अपने घरों में पंखे लगा लिए हैं।