गर्मी बढ़ते ही बिजली सितम ढहाने लगी है। शहर से लेकर देहात क्षेत्र तक बिजली को लेकर हा-हाकार मचा है। रात हो या दिन, बड़े पैमाने पर कटौती की जा रही है। सरकार द्वारा निर्धारित शेड्यूल धराशायी हो गया है।
शहरियों को 16 तो ग्रामीणों को पांच छह घंटे सप्लाई मिल रही है। रही सही कसर ट्रिपिंग की वजह से पूरी हो रही है। किसान अपनी फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। शहरियों का हाल बेहाल है। बावजूद इसके अधिकारी पूरी आपूर्ति देने का दावा कर पीछा छुड़ा रहे हैं।
दिन प्रतिदिन गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में राहत देने का बिजली ही एक मात्र विकल्प है, लेकिन मौजूदा समय में वह भी लड़खड़ा गई है। शहरियों को 24 व ग्रामीणों को 18 घंटे आपूर्ति करने का रोस्टर मानों पूरी तरह नेस्तानाबूद हो गया है।
गांव हो या फिर शहर, हर ओर बिजली को लेकर त्राहि त्राहि मची है। नागरिकों को 24 में से 15-16 घंटे आपूर्ति मिल रही है, बाकी सप्लाई ट्रिपिंग व फाल्ट आदि में बर्बाद हो रही है। लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों की स्थिति और भी बदतर है।
सरकार ने 18 घंटे सप्लाई देने का दावा किया है, लेकिन सप्लाई की स्थिति देखें तो यह दावा खोखला साबित हो रहा है। पांच-छह घंटे आपूर्ति मिल रही है, उसमें भी बार-बार ट्रिपिंग होती है, जिससे फसलों की सिंचाई किसान नहीं कर पा रहे हैं।
खेत तक पानी जाता है फिर सप्लाई बंद हो जाती है। बस यही सिलसिला लगातार चल रहा है। गर्मी में व्यापक कटौती से स्थिति बिगड़ती जा रही है। ग्रामीण व शहरियों में आक्रोश है जो किसी भी दिन फूटकर बवाल करा सकता है।