Samajwadi Party tussle brings Strategy crisis for Other Parties
सपा के कुनबे में चली आ रही खींचतान का भले ही अंत बताया जा रहा हो, लेकिन लखनऊ में रविवार को आयोजित हुए अधिवेशन से तस्वीर बदलती दिख रही है। इसमें शामिल होने के लिए जनपद से पहुंचे माननीय व पार्टी पदाधिकारियों से कार्यकर्ता पल-पल का हाल चाल पूछते रहे। लगातार उनके चेहरे की रंगत बदलती गई। शाम तक हर कोई बेचैन दिखा, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का पता चलते ही कार्यकर्ताओं में खुशी दौड़ गई।
समाजवादी पार्टी में मचे घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी सीएम व प्रोफेसर रामगोपाल यादव को निष्कासित कर फिर से पार्टी में वापस लिया जा रहा था तो कभी अधिवेशन को लेकर पार्टी के अंदर विरोध के स्वर उठते दिख रहे थे। मुख्यमंत्री अपने निर्णय पर अटल रहे। उन्होंने पहली जनवरी को लखनऊ में जो अधिवेशन बुलाया उसमें जिले के तमाम कार्यकर्ता व पदाधिकारी शामिल होने के लिए पहुंच गए। सूूबे की सियासत में क्या चल रहा है, यह जानने के लिए हर कोई आतुर दिखा।
नए साल में हैप्पी न्यू ईयर कहने की बजाय पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने अजीजों को मोबाइल फोन कर अधिवेशन का हाल जानते रहे। उतार व चढ़ाव की सूचनाएं मिलने से उनकी धड़कनें कभी तेज तो कभी धीमी होती रहीं। शाम को जब उनको पता चला कि सीएम राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं तो उनके चेहरों पर खुशी छा गई। मिठाइयां बांटने का सिलसिला चालू हो गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।