तहसील का रजिस्ट्रार कार्यालय बुुधवार सुबह दस बजे अखाड़ा बनते-बनते रह गया। जमीन की रजिस्ट्री कराने को लेकर वकील गौरव गोयल और लेखपाल चौ.रमेश सिंह के बीच गाली गलौज हो गई। एक दूसरे को देख लेने की धमकियां दी गईं, जिससे हंगामा हो गया। कार्यालय में अफरातफरी मच गई। दोनों के पक्ष में साथियों के उतर आने से माहौल गर्म रहा।
वकील के पक्ष में उतरे तहसील बार एसोसिएशन ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर लेखपाल पर कार्रवाई नहीं होने तक न्यायिक कार्य से विरत रहने का एलान किया है, वहीं लेखपाल के फेवर में लेखपाल संघ मैदान में आ गया है। संगठन ने एसडीएम को मसले से अवगत कराते हुए वकील के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लेखपाल बोले, वकील ने की अभद्रता
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की शाखा अमरोहा के पदाधिकारियों ने एसडीएम के नाम संबोधित ज्ञापन में कहा है कि सुबह दस बजे लेखपाल चौ.रमेश सिंह अपने रिश्तेदारों की जमीन की वसीयत रजिस्ट्री कराने तहसील परिसर में गए थे। इसी दौरान रजिस्ट्री आफिस में अधिवक्ता गौरव गोयल और उनके पिता रमेश चंद गोयल आ गए।
आरोप है कि लेखपाल से कहा कि वसीयत मेरी ओर से लिखी गई थी। तुम दूसरे वकील से वसीयत रजिस्ट्री कराओगे तो मैं रजिस्ट्री नहीं होने दूंगा। यह काम हम ही कराएंगे। ज्यादा रुपये मांगने की बात जब लेखपाल ने कही तो गौरव ने गाली गलौज शुरू कर दी। आरोप लगाया है कि लेखपाल संग अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। पत्र पर सचिव नरेंद्र सिंह आदि पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
अधिवक्ता बोले- रिपोर्ट दर्ज कर लेखपाल को किया जाए गिरफ्तार
अमरोहा। इस मामले में अधिवक्ता गौरव गोयल से लेखपाल की ओर से अभद्रता का आरोप लगाते हुए सदर तहसील बार एसोसिएशन मैदान में है। घटना के बाद एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तहसील भवन में बैठक की, जिसकी अध्यक्षता करते हुए प्रमोद कुमार भटनागर ने घटना की निंदा की। कहा कि बार संरक्षक रमेश चंद्र गोयल संग किए गए अभद्र व्यवहार को किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
आरोप लगाया कि, लेखपाल चौ.रमेश सिंह ने उनके संग गाली गलौज कर बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी दी है। इसके बाद बैठक में मंडलायुक्त के नाम मांग पत्र तैयार किया गया, जिसमें लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसको गिरफ्तार करने की मांग की गई। वहीं कहा गया कि, लेखपाल बीस साल से तहसील में कार्यरत है।
तबादला होने के बाद भी उसको कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है, उसे कार्यमुक्त करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक मांग पूरी नहीं की जाएंगी तब तक अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे और आंदोलन जारी रखेंगे। इस दौरान अध्यक्ष पीके भटनागर के अलावा सभी अधिवक्तागण मौजूद थे।