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लक्ष्मी रूपी कन्याओं की गूंजी किलकारियां

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गजरौला सीएचसी में धनतेरस पर कन्या के जन्म लेने के बाद प्रफुल्लित परिवार। - फोटो : GAJRAULA
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गजरौला (अमरोहा)। धनतेरस पर औद्योगिक नगरी क्षेत्र में 23 कन्याओं की किलकारियां गूंजी। इस मौके पर कन्याओं का जन्म होना शुभ माना जाता है। इसलिए कुछ घरों में मां लक्ष्मी के रूप में कन्याओं के जन्म लेने पर परिजनों में खुशियां और उत्साह देखने को मिला। हालांकि वर्तमान समय में समाज कन्याओं के जन्म पर मायूसी भरे लहजे में स्वीकार करता है। जिन परिवारों में कन्याओं ने जन्म लिया है उन परिवारों का कहना था कि यह लक्ष्मी की अनुकंपा ही है कि उन्होंने धनतेरस के दिन कन्या के रूप में उनके यहां जन्म लिया।
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शुक्रवार को धनतेरस पर औद्योगिक नगरी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों में 23 कन्याओं ने जन्म लिया। जिसमें छह कन्याओं का जन्म गजरौला सीएचसी में हुआ जबकि 17 कन्याएं क्षेत्र के निजी अस्पतालों में जन्मी। सीएचसी में सुबह सवा छह बजे नगर के मोहल्ला शांति नगर निवासी सीमा पत्नी ललित और अपरान्ह पौने दो बजे गांव सहसौली से आईं राहुल की पत्नी शशिबाला ने कन्याओं को जन्म दिया। दोनों ही परिवारों की खुशियां देखने लायक थीं। गांव सहसौली से आए चंद्रप्रकाश और उनकी पत्नी भाग्यवती को जब आशा कार्यकर्ता पूनम ने बताया कि उनकी पुत्रवधू शशिबाला ने कन्या को जन्म दिया है तो यह सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। डिलीवरी कक्ष में मौजूद स्टाफ नर्स दीपा और रीना यादव ने बताया कि उत्साहित सास ने आते ही अपनी बहू का माथा चूम लिया और पोती को सीने से लगा लिया। पिता राहुल और देवर राजकुमार भी खुशी से लबरेज नजर आए। इन सभी का कहना था कि आज के जमाने में कन्याएं अभिषाप नहीं हैं। बल्कि उन्हें तो यह सोचकर बेहद खुशी है कि धनतेरस के दिन उनके यहां धन की देवी लक्ष्मी ने जन्म लिया है। मान्यता है कि धनतेरस यानी स्वास्थ्य धन रूपी भगवान धनवंतरी, मां लक्ष्मी और धनकुबेर की पूजा का त्योहार है, लेकिन औलाद भी धन रूपी ही होती है। खास कर धनतेरस पर कन्या के जन्म होने पर धन के लिए शुभ संकेत माना जाता है।
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