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Amroha News: दो चिकित्सकों के भरोसे धनौरा का सरकारी अस्पताल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मंडी धनौरा। धनौरा का सरकारी अस्पताल इस समय स्वयं बीमार है। रोगियों का इलाज करने के लिए सरकारी अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं हैं। सरकारी अस्पताल में इस समय अधीक्षक समेत मात्र तीन ही चिकित्सक तैनात हैं।
अधीक्षक को प्राय: विभागीय बैठक व अदालती कार्रवाई में शामिल होने के लिए अमरोहा जाना पड़ता है। पैरा मेडिकल स्टाफ की भी कमी चल रही है। उच्चाधिकारियों को चिकित्सकों की कमी की जानकारी होने के बावजूद कोई सुधार होने को तैयार नहीं है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अधीक्षक डॉ. राहुल कुमार, चिकित्साधिकारी मनदीप कुमार व महिला चिकित्सक पूर्णिमा शर्मा की तैनाती है।
पूर्णिमा शर्मा ने छह माह की छुट्टी के बाद बीती 16 मई से अस्पताल में अपनी सेवाएं देना शुरू किया है। सीएचसी पर हड्डी रोग, नेत्र रोग व बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। अधीक्षक को प्राय: विभागीय बैठक व कोर्ट में जाना होता है।
दो चिकित्सक ही सीएचसी पर आने वाले सैंकड़ों रोगियों का परीक्षण कर उनको दवाएं लिख रहे हैं। डॉक्टरों की कमी की वजह से रोगियों को निजी चिकित्सकों से उपचार कराना पड़ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने की वजह से सीएचसी रेफरल यूनिट बन गई है। अस्पताल में खून की जांच करने वाली मशीन अभी ठीक नहीं हुई है। मरीजों को जांच के लिए निजी पैथोलॉजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
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एक माह पहले जनपद के प्रभारी मंत्री केपी मलिक ने सीएचसी का निरीक्षण किया था। उस समय मीडिया व भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंत्री के समक्ष चिकित्सकों की कमी का मुद्दा उठाया था। मंत्री केपी मलिक ने मौके पर मौजूद सीएमओ योगेंद्र सिंह से चिकित्सकों की तैनाती करने को कहा था। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सरकारी अस्पताल सिर्फ बुखार, सर्दी, जुकाम आदि बीमारी का इलाज करने तक सीमित रह गया है।
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