सरकार की प्राथमिकता में शामिल धान खरीद की स्थिति जनपद में बेहद सुस्त है। डेढ़ माह बीतने के बाद भी क्रय एजेंसियां लक्ष्य के सापेक्ष दस फीसद धान की खरीद नहीं कर सकी हैं। क्रय केंद्र प्रभारियों के साथ-साथ अधिकारी क्रय केंद्रों पर तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन वहां मौजूद अव्यवस्थाओं को लेकर किसान असमंजस में हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 में धान की खरीद को लेकर शासन से लेकर प्रशासन तक बेहद सतर्क है। गेहूं की बंपर पैदावार के बाद रिकार्डतोड़ खरीद से उत्साहित सरकार ने सभी एजेंसियों के लिए धान का खरीद लक्ष्य घोषित कर दिया। एक अक्टूबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत जनपद में शुरू हुई धान की खरीद की हालत डेढ़ माह में बेहद सुस्त नजर आई। चुनिंदा किसानों को छोड़ दें तो अभी किसी भी क्रय केंद्र पर किसान धान लेकर नहीं पहुंच रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि अभी कई जगह धान की कटाई ही नहीं हुई और जिन किसानों के धान कट गए उन्हें अभी वह सुखा रहे हैं।
इसमें सबसे खराब स्थिति तो गजरौला मंडी समिति लगे दो सरकारी क्रय केंद्रों की है। यहां डेढ़ माह में लक्ष्य के सापेक्ष पांच फीसद भी धान खरीद नहीं हो पाई है। मंडी समिति में आरएफसी धान क्रय केंद्र का लक्ष्य करीब 7.50 हजार क्विंटल रखा गया था जिस पर अभी तक केवल 550 क्विंटल ही धान खरीद हो पाई है। जबकि यही हाल मंडी समिति में लगे एफसीआई क्रय केंद्र का भी है।