शरद पूर्णिमा पर ब्रजघाट गंगा में स्नान करते श्रद्धालु। स्रोत नाविक
गजरौला। शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य कमाया। भोर से ही शुरू हुआ स्नान का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। तट पर गंगा मैया के जयकारे गूंजते रहे। बारिश के बाद भी ब्रजघाट और तिगरी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। गंगा में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पतित पावनी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान भी कराए।
मंगलवार को शरद पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करने के लिए तिगरी और ब्रजघाट में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। तिगरी निवासी पंडित गंगा शरण शर्मा और बुध बाजार के पंडित दयानंद शर्मा के मुताबिक शरद पूर्णिमा को वाल्मीकि पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन गंगा में स्नान करने, पुरोहितों को दान दक्षिणा देने और धार्मिक अनुष्ठान कराने से सब मनोरथ पूर्ण होते हैं। घर में सुख समृद्धि आती है।
जरूरतमंदों को दिया दान
शरद पूर्णिमा पर बारिश होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था उस पर भारी रही। दोनों ही स्थानों पर सैलाब उमड़ा। भोर होते ही श्रद्धालुओं ने हर हर गंगे के उदघोष संग पतित पावनी में डुबकी लगाई। गंगा में स्नान का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। गंगा में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पुरोहितों को दान दक्षिणा देकर तृप्त किया। जरूरतमंदों को भी दान किया। गंगा किनारे धार्मिक अनुष्ठान कराए। सुबह शुरू हुआ गंगा में स्नान का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा।