हाईवे पर गुजरता कावड़ियों का जत्था।
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जय जय शिव शंकर कांटा लगे ना कंकर...गीत की चंद लाइनें कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों पर सटीक बैठ रही हैं। शिव की महिमा ही है कि शिवभक्तों की नींद में कांटे और कंकर भी खलल नहीं डालते। दरअसल रात में कांवडियों ने सख्त और पथरीले हाइवे को ही अपना बिस्तर बनाया और भर नींद सोए।
शनिवार की सुबह चार बजे। हाइवे का नजारा अलहदा था। शुक्रवार की देर शाम जिस हाइवे पर कांवड़ियां आगे बढ़ते दिखाई दे रहे थे और रैला उमड़ा हुआ था। आधी रात के बाद हाइवे पर कांवड़ियों की चहलकदमी नहीं थी। रात के तीसरे पहर कुछेक कांवड़ियां ही आगे बढ़ रहे थे। कुछ डाक कांवड़ में भजन और गीत बंद थे। कुछेक भजन बज रहे थे। काफी कांवड़ियां शिविरों में रुक कर वहीं सो गए लेकिन, जिन्हें शिविरों में जगह नहीं मिली।
उन्होंने हाइवे पर ही नींद निकालना उचित समझा। हारे थके कदमों के साथ जब रात के तीसरे पहर नींद ने जोर दिया तो जहां तहां कांवड़ियों ने पड़ाव डाल दिया। बैठी और झूूला कांवड़ शिवभक्तों ने नियत स्थान पर बांध दी या रख दी। इसके बाद सो गए। सुबह चार बजे तक हाइवे पर जगह जगह कांवड़ियां सो रहे थे।
शिवभक्तों को हाइवे पर सोता देख यकीन करना मुश्किल था कि रोजाना गद्दो पर सोने वाले लोग आज सड़क पर भर नींद कैसे सो गए।
यह शिव की महिमा ही है कि सड़क पर भी गहरी नींद आ गई। शिवभक्तों ने सड़क की चुभने वाली बजरी और कंकरों का भी अहसास नहीं किया। दिन में कांवड़ियों से गुलजार रहने वाला हाइवे रात में शिवभक्तों को अपने आगोश में रहकर खामोश था। हालांकि हाइवे पर रातभर ट्रैफिक बंद रहा।
सोते हुए कांवड़ियों की निगरानी उनके साथ जाग रहे एक दो शिवभक्त् कर रहे थे। या फिर पुलिस की गश्ती जीप कभी कभार निकलती नजर आई।