उन्होंने कहा कि मन के विषयों से अपने उपयोग (ध्यान, मन) को हटाकर आत्मा में स्थिर करना वह इन्द्रिय संयम कहलाता है। यह संयम इतना महत्त्वपूर्ण है कि इसके बिना जिनराज अर्थात तीर्थंकर आदि भी इस संसार से पार नहीं होते और जिसके बिना यह जीव जगत-रूपी कीचड़ में पड़ा रहता है, भ्रमता, रुलता रहता है। दोपहर में सभी लोगों ने मंदिर पहुंचकर धूपदशमी का पर्व मनाया गया। जहां सभी लोग मिलकर धूप चढ़ाई गई। शाम को आरती, बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस दौरान अध्यक्ष योगेश कुमार जैन, महामंत्री शरद कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, अतुल कुमार जैन, संयम जैन, अरुण जैन, निरुपमा जैन, रीता जैन, सरिता जैन, रजनी जैन आदि मौजूद रहे।