अमरोहा। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने से पहले ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो गया था। ऐसे में ग्राम पंचायतों की कमान प्रशासकों को सौंप दी गई थी। नये प्रधानों को शपथ दिलाए जाने से पहले तक ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जाने की जिम्मेदारी प्रशासकों की थी। जिले की 86 पंचायतों में प्रशासकों ने पांच करोड़ से अधिक की रकम खर्च कर दी है। मंडलायुक्त ने ऐसे सभी मामलों में जांच बैठा दी है। उन्होंने डीपीआरओ से जानकारी मांगी है।
जनपद में कुल 597 ग्राम पंचायतें है। सभी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को खत्म हो गया था। इसके साथ ही सहायक विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक नामित किया गया। ग्राम पंचायतों के खाते में लाखों रुपये रह गए। इसके बाद सहायक विकास अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों में काम कराना शुरू कर दिया। हालांकि इन लोगों ने पंचम वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग के रकम को खर्च करने में खूब मनमानी की है। जानकारी मिलने के बाद कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने डीपीआरओ से ब्योरा तलब किया है। इसके बाद सीडीओ को ग्राम पंचायतों की सूची दी गई है। इसके साथ ही अब ग्राम पंचायतों में कराए गए कामों की पड़ताल की जानी है नियमों और मानक के उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।
10 लाख से अधिक खर्च करने वाली ग्राम पंचायत
अहरोई (अमरोहा), ढक्का (हसनपुर), सिहाली जागीर (गजरौला), डिडौली और कैलसा (जोया), ढ्योटी, शेरपुर, आजमपुर और चुचैला कला (धनौरा) जबकि चंदनकोटा, सांथलपुर, आदमपुर, बुरावली, मरौरा, मंगरौला और बिहारीपुर ऐ. (गंगेश्वरी) शामिल हैं।
प्रशासक की अवधि में जिले की 18 ग्राम पंचायतों में 10 लाख रुपये से अधिक काम कराए गए हैं। इसके अलावा 76 ग्राम पंचायतों में पांच लाख रुपये से अधिक रुपये भुगतान हुआ है। कमिश्नर के निर्देश के बाद पंचायती राज विभाग ने जानकारी उपलब्ध कराई है।
- चंद्रशेखर शुक्ल, सीडीओ