जिले में मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र से लेकर हसनपुर तहसील क्षेत्र एवं उससे भी आगे तक वन विभाग की हजारों बीघा भूमि पर अवैध कब्जा अब किसी से छिपा नहीं रह गया है। वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा कर फसलें तो उगाई ही जा रही हैं। खास बात यह है भू-माफिया ने बृजघाट से लेकर नरौरा तक गंगा किनारे वन्य जीवों के लिए आरक्षित किए गए आर्द्र भूमि क्षेत्र यानि रामसर जोन को भी नहीं छोड़ा है। राजनीतिक दखल रखने वाले भू-माफिया ने रामसर जोन पर भी अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। जिस पर गेहूं एवं गन्ने समेत कई प्रकार की फसलें लहलहा रही हैं। लेकिन प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
रामसर जोन यानि आर्द्र भूमि वे क्षेत्र होते हैं जहां पानी पर्यावरण और इससे जुड़े पौधे और वन्य जीवन को नियंत्रित करने के प्राथमिक कारक होते है। वे वहां पाए जाते हैं जहां पानी का तल जमीन की सतह पर या इसके पास होता है, या जहां की भूमि पानी से भरी होती है। ये पहले कभी पानी या भूमि की ओर परिवर्ती या क्रमिक चरणों में बदलते हुए वास स्थलों के रूप में माने जाते थे लेकिन अब आर्द्र भूमियों को विशिष्ट पारिस्थितिक विशेषताओं, कार्यों और मूल्यों के साथ अलग पारिस्थितिकी प्रणालियों में माना जाता है। वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में रामसर जोन यानि आर्द्र भूमि क्षेत्र के लिए जमीन आरक्षित की थी। यह आर्द्र भूमि क्षेत्र ब्रजघाट से लेकर नरौरा तक गंगा किनारे का हजारों बीघा भूमि का क्षेत्रफल है।
यह भूमि जलीय एवं थलीय वन्य जीवों के लिए सुरक्षित मानी गई थी। जिले में भू-माफिया का दबदबा होने के चलते वन विभाग की हजारों बीघा भूमि पर कब्जे के साथ ही रामसर जोन पर भी माफिया का ही राज है। यहां वनों को काटकर गेहूं, गन्ना समेत कई प्रकार की फसलें लहलहा रही हैं। वन्य जीवों के लिए सुरक्षित माना जाने वाला रामसर जोन अब वन्य जीवों के लिए असुरक्षित हो चुका है। वन कटने कि वजह से यहां ज्यादातर वन्य जीव शिकारियों का शिकार हो गए। या जो बचे वह यहां से भाग रहे हैं। प्रशासन रामसर जोन को सुरक्षित रखने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है।