अभिषेक के गायब होने के मामले में परिजनों ने जिस व्यक्ति को संदिग्ध माना था। पुलिस ने उसे पकड़ तो लिया था, लेकिन बिना बताए या कार्रवाई के छोड़ दिया। ऐसे में हत्या का मामला सामने आने पर संदिग्ध की ओर परिजनों का शक गहरा रहा है। यदि साक्ष्य संदिग्ध के खिलाफ मिलते हैं तो गजरौला पुलिस पर भी तमाम सवाल खड़े हो जाएंगे।
राजमिस्त्री नरेश का मासूम बेटा अभिषेक जब स्कूल से नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। तफ्तीश में पता चला कि गेटमैन ने स्कूल देरी से पहुंचने पर उसे लौटा दिया। यही जानकारी पुलिस को परिजनों ने दी।
दस दिसंबर को परिजन वसेली फाटक के पास गेटमैन से जानकारी करने पहुंचे तो उसने बताया कि बच्चे को लाल साइकिल वाले युवक के साथ देखा गया था। परिजनों ने पुलिस को यह जानकारी दी तो पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में ले लिया।
जांच में पता चला कि संदिग्ध युवक गजरौला की एक दूध की डेयरी पर काम करता है। वह सात तारीख को बिना किसी कारण के डेयरी से सुबह के समय काम छोड़कर गया था। आठ व नौ दिसंबर को भी वह काम पर नहीं गया। अपने घर में ही बैठा रहा।
पुलिस के मुताबिक संदिग्ध को उसके घर से ही हिरासत में लिया था लेकिन पूछताछ में उसके पास से ऐसा कोई सुराग नहीं मिला जिससे वह बच्चे तक पहुंचा सके, क्योंकि बच्चे का शव मिल चुका है। संदिग्ध पर परिजनों का शक और बढ़ गया है। पुलिस पर घटना का खुलासा करने का भी दबाव है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि संदिग्ध युवक ही दोषी निकला तो गजरौला पुलिस को कटघरे में जाने से कौन बचा सकता है।