कश्मीरियों के साथ अमरोहा के संबंध पहले से जुड़ते रहे हैं। अब से 16 साल पहले भी ढबारसी के एक मदरसे में साल भर तक कश्मीर के दो दर्जन युवक रहे थे, जोकि ढबारसी के दो युवकों को भी अपने साथ ले गए। कुछ दिनों बाद एक युवक तो लौट आया था, लेकिन दूसरे का आज तक कहीं पता नहीं चल सका है।
जम्मू कश्मीर के पुलवामा और सोपियां के दो दर्जन युवक साल 2001 में ढबारसी की स्थित जियारत में चलने वाले मदरसे में पढ़ने के लिए आए थे। एक साल बाद जब कश्मीरी युवक यहां से लौटे तो ढबारसी के राशिद पुत्र बाबू और फुरकान पुत्र अलीजान को अपने साथ ले गए।बताते हैं कि इसके बाद कश्मीरी युवकों ने संभल को अपना ठिकाना बनाया। संभल के कई मदरसों में कश्मीरियों का ठिकाना था।
ढबारसी का फुरकान उनकी मंशा को भांप कर अपने घर लौट आया था। वहीं राशिद को कश्मीरी अपने साथ ले गए थे। राशिद का कोई पता नहीं चला। परिजनों ने भी काफी तलाश किया गया था। जाने के करीब एक साल के बाद राशिद ने पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश की सीम से सटे डाकखाने से घर के लिए आठ हजार रुपये का मनी आर्डर किया। मनी आर्डर आने पर परिजनों को राशिद के मिलने की एक बार फिर उम्मीद जगी।
राशिद के पिता ने उस डाकखाने पहुंचकर राशिद की जानकारी हासिल की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल सका। जिले के खुफिया तंत्र को ढबारसी में कश्मीरियों के रहने की भनक तक नहीं लगी थी।