बदमाशके परिजनों से पोस्टमार्टम हाउस पर जानकारी लेती पुलिस।
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बुधवार को देररात मुठभेड़ में मारे गए हिस्ट्रीशीटर इंतजाम अली ने छोटी उम्र में ही बड़ी दहशत कायम की थी। मात्र 27 साल की उम्र में परिवार-पड़ोस से लेकर आसपास के क्षेत्र में हिस्ट्रीशीटर आतंक का पर्याय बन गया था। यही वहज रही कि मुठभेड़ में मारे जाने के बाद खुुद उसके परिवार के लोगों ने ही शव को अपनाने से इंकार कर दिया था।
नौगावां तहसील के गांव अपरौला निवासी इंतजार अली के चार पुत्र में से दूसरे नंबर के इंतजाम अली पर कई मामलों में 14 मुकदमे दर्ज थे। छोटी सी उम्र से ही ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देकर हिस्ट्रीशीटर ने लोगों के दिलों दिमाग में कुख्यात छवि बना ली थी। उसके परिवार से लेकर पड़ोस और आसपास के क्षेत्र में हिस्ट्रीशीटर की दहशत कायम हो गई थी। हसनपुर से दीपपुर गांव को जाने वाले रास्ते पर बुधवार की देररात पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारे जाने के बाद हिस्ट्रीशीटर की मौत की खबर आसपास के क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। लेकिन हिस्ट्रीशीटर की मौत के बाद कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। खुद उसके परिजनों ने शव को अपनाने से इंकार कर दिया था। हिस्ट्रीशीटर के शव को जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया गया। उसकी दहशत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पोस्टमार्टम के बाद शव की लेने के लिए शव गृह पर उसके पिता के अलावा बमुश्किल सात से आठ लोग ही पहुंचे थे।