अमरोहा। लॉकडाउन के दौरान शुद्ध हुई शहर की आबोहवा में जहर खुलने जा रहा है। दिवाली पर डेढ़ करोड़ की आतिशबाजी से जहरीला विस्फोट होने को तैयार है। आतिशबाजी से होने वाले विस्फोटक हादसों को लेकर जिला प्रशासन गंभीर नहीं हैं। आबादी के आस-पास आतिशबाजी के नौ गोदाम हैं। जो मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बाजारों में आतिशबाजी की दुकानें सजी हुई है। दीपावली को लेकर गोदाम और दुकानों में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जमा कर रखी है। कभी भी कोई हादसा हो सकता है। बावजूद इसके जिम्मेदार मौन होकर बैठे हैं।
चौदह नवंबर को दीपावली का पर्व है। इस दिवाली पर डेढ़ करोड़ की आतिशबाजी छोड़े जाने का अनुमान है। इतनी बड़ी तादाद में आतिशबाजी हुई तो शहर की आबोहवा में जहर घुल जाएगा। जो दमा, सांस जैसे मरीजों के दिक्कत डालेगा। इतना ही नहीं शहर के बीच घनी आबादी के इर्द-गिर्द नौ स्थानों पर बारूद के ढेर जमा है, थोड़ी सी चूक से कभी भी हादसा हो सकता है। प्रशासन आंखें मूंदे हुए है। शहर में स्थित पटाखा दुकानों की जांच करना भी उचित नहीं समझ रहा है। शहर के दानिशमंदान, नानकचंद रोड, मोहल्ला कोट, लकड़ा बाजार, बड़ा बाजार और कांठ रोड समेत संकरी गलियों में बने पटाखा गोदाम और दुकानों की जानकारी शासन-प्रशासन को है, लेकिन पटाखा कारोबारियों के आगे वह बौना साबित हो रहे हैं। दिवाली आने वाली है। शादी-विवाह आदि आयोजनों के लिए आबादी के बीचों बीच दुकानों में लाखों के पटाखों का भंडारण है। बारूद से बने पटाखों के भंडारण का बाकायदा मानक तय है, लेकिन शहर में इन मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सुरक्षा मापदंडों की भी अनदेखी हो रही है। नियमों के मुताबिक पटाखों का भंडारण शहर के बाहर होना चाहिए। पटाखों के भंडारण लाइसेंस में भी इस बात का उल्लेख रहता है, लेकिन शहर में पटाखा भंडारण के गोदाम आबादी के आस-पास और बीच में स्थित है। साथ ही इन्होंने तय मात्रा से चार गुना अधिक भंडारण कर रखा है। इन दुकानों पर सुरक्षा के तौर पर न तो अग्निशमन यंत्र, बालू से भरी बाल्टी है और नहीं पानी का टैंक रखा हुआ है। जहां बालू से भरी रेत है तो वह भी जम चुकी हैं। अग्निशमन यंत्र काफी पुराने हो चुके हैं। ऐसे में यदि विस्फोट हुआ तो फिर बड़ी आबादी को जानमाल की हानि झेलनी पड़ सकती है। आतिशबाजी के थोक विक्रेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस बार दिवाली पर करीब डेढ़ करोड़ की आतिशबाजी जलाई जाने का अनुमान है।
बीच शहर में लगी हुईं हैं दुकानें
अमरोहा। शहर के बाजारों और व्यस्त क्षेत्रों में पटाखों की दुकानें सजी हुई हैं। इन दुकानों पर कहने को तो होलसेल का काम होता है, लेकिन स्थायी लाइसेंस के नाम पर यह पूरे सीजन जमकर फुटकर बिक्री करते हैं। शहरी बस्तियों और बाजारों के बीच संचालित इन दुकानों से हादसे का अंदेशा बना रहता है। प्रशासन की ओर से न तो सुरक्षा के साधन चेक किए जाते हैं न ही इन्हें शहर से बाहर स्थापित करने पर जोर रहता है जबकि बाकी शहरों में आबादी से दूर इनको दुकानें लगाने की अनुमति दी जाती है। पटाखा दुकान-गोदाम के आसपास बड़ी संख्या में मकान हैं। ऐसे में इन दुकानदारों को हादसे का भय बना रहता है।
आतिशबाजी का एक-एक सैंपल आबादी में रखा जा सकता है, लेकिन गोदाम और दुकानें शहर से बाहर होनी चाहिए। आतिशबाजी के जो गोदाम या दुकानें आबादी में संचालित हैं। उन्हें हटाया जाएगा। अगर छापेमारी के दौरान आतिशबाजी पकड़ी गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- रविंद्र सिंह, इंस्पेक्टर कोतवाली नगर
नगर क्षेत्र में आतिशबाजी के नौ गोदाम संचालित हैं। उनकी दुकानें भी है। सभी गोदामों के पास दमकल की एनओसी है। गोदाम भी शहर के बाहर हैं। लेकिन, आतिशबाजी की दुकानें आबादी के भीतर चल रही है। इनकी दुकानों पर भी भारी मात्रा में आतिशबाजी एकत्र रहती है, जो एक दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कई बार निर्देशित किया जा चुका है। लेकिन, यह लोग सुनने को तैयार नहीं होते ।
- रजा हसनैन, फायर स्टेशन इंचार्ज