स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। मिलते जुलते नामों की गफलत में कोरोना आशंकित मरीज को शुक्रवार शाम चार बजे घर भेज दिया। जबकि उसकी रिपोर्ट नहीं आई थी। इस आशंकित मरीज की रिपोर्ट शनिवार को आई तो वह पॉजिटिव निकला। जिसे लेकर सेहत महकमे में हड़कंप मच गया।
रिपोर्ट आने के बाद पहुंची टीम नाम की गलती बताकर उसे विम्स हास्पिटल में भर्ती कर दिया। इस दौरान वह 19 घंटे परिवार के साथ रहा। दोपहर बाद उसके परिवार के 11 सदस्यों को क्वारंटीन कर दिया गया। वहीं जिम्मेदार इसे छोटी मोटी गलती बता रहे हैं।
दअरसल शुक्रवार को 102 सैंपलों को जांच रिपोर्ट अमरोहा पहुंची थी। इसमें पुणे में फूलों का काम करने वाला एक मजदूर कोरोना संक्रमित पाया गया था। जबकि 101 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 102 लोगों की लिस्ट में तीन युवकों नाम मिलते-जुलते थे, लेकिन उनका सर नेम अलग-अलग था। तीनों निगेटिव थे। इसी नाम का चौथा युवक 27 मई को महाराष्ट्र के पुणे से लौटा था। उसका भी सैंपल कराया गया था।
उसे गजरौला के संजीवनी अस्पताल में क्वारंटीन किया गया था। स्वास्थ्य कर्मियों ने रिपोर्ट निगेटिव बताकर शुक्रवार की शाम चार बजे युवक को एंबुलेंस से घर छोड़ दिया। रात कोरोना संक्रमित मरीज अपने परिवार के साथ रहा। कुछ दोस्त और पहचान वाले भी हालचाल जानने भी पहुंचे। शनिवार की सुबह जब 61 सैंपलों की रिपोर्ट आई तो स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई।
घर छोड़े गए युवक की रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। आनन-फानन में डॉक्टरों की टीम युवक के घर पहुुंची और उसे विम्स हास्पिटल ले आई। इस दौरान वह करीब 19 घंटे परिवार के बीच रहा। जिम्मेदारों की इस लापरवाही से युवक का परिवार सकते में आ गया। देर शाम परिवार के सभी 11 सदस्यों को क्वारंटीन कर दिया गया।
छोटी-मोटी गलती हो जाती है। एक दिन में 102 सैंपलों की रिपोर्ट आई थी। इसमें एक नाम के चार लोग थे। इसके वजह से गलतफहमी हो गई थी। वह युवक पुणे से लौटने के बाद भी घर पहुंचा था। फिलहाल उसके परिजनों को क्वारंटीन कराया गया है।
- डॉ हरिदत्त नेमी, एसीएमओ,