चार दिवसीय सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा नहाय खाय के साथ शुक्रवार (आज) से शुरू होगी। इसके बाद खरना होगा। इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखेंगी और शाम को पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगी। जबकि 30 अक्तूबर की शाम डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 31 अक्तूबर की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर पुजा संपन्न होगी।
घर से घाट तक छठ महापर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएं छठ मइया का प्रसाद तैयार करने में जुट गई हैं। बाजारों में प्रसाद की सामग्री की खरीदारी भी जोरों पर चल रहा है। पूर्वांचल में इसका विशेष महत्व माना जाता है। कई दिन से इसकी तैयारी चल रही थी। इस बार शुक्रवार से यह पर्व शुरू होगा और सोमवार तक मनाया जाएगा। महिलाएं इस पर्व पर... पहिले-पहिले हम कइली छठ मइया बरत तोहार, करिह क्षमा छठी मइया भूल-चूक गलती हमार...जैसे पारंपरिक गीत गुनगुनातीं हैं।
यह है मान्यता
श्रीबाबा गंगानाथ मंदिर के पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, छठ हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानी छठी तिथि पर मनाया जाता है जो नहाय खाय की परंपरा से प्रारंभ होता है। यह व्रत करने वाले व्रती 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखते हैं। जिसके बाद छठी मैया की आराधना और सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत का समापन किया जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक छठी मइया सूर्य देव की बहन हैं।
पहला दिन : नहाय खाय
चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है। इस दिन व्रती स्नान कर नए वस्त्र धारण कर पूजा के बाद चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल को प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं। व्रती के भोजन करने के बाद परिवार के सभी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।
दूसरा दिन: खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन को खरना के नाम से जाना जाता है। इस पूजा में महिलाएं शाम के समय मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाती हैं। महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। पौराणिक
कथाओं के अनुसार मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही छठी मइया का घर में आगमन हो जाता है।
तीसरा दिन: डूबते हुए सूरज को अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती महिलाएं उपवास रखती हैं। साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करती हैं। शाम के समय नए वस्त्र धारण कर परिवार संग किसी नदी या तालाब पर पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूरज को अर्घ्य देते हैं। तीसरे दिन का निर्जला उपवास रातभर जारी रहता है।
चौथा दिन : उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा के चौथे दिन पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसे ऊषा अर्घ्य या पारण दिवस भी कहा जाता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं सात या ग्यारह बार परिक्रमा करती हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है। 36 घंटे का व्रत सूर्य को अर्घ्य देने के बाद तोड़ा जाता है।