फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: नहाय खाय के साथ छठ पूजा आज से, महिलाओं ने की खरीदारी

Sat, 25 Oct 2025 02:19 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा नहाय खाय के साथ शनिवार से शुरू होगा। अनुष्ठान के दूसरे दिन खरना का प्रसाद बनेगा। तीसरे दिन शाम को छिपते हुए भगवान सूर्य को जल से अर्घ्य दिया जाएगा। चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा। पर्व को लेकर लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है। पुलिस भी सतर्क हो गई है।
विज्ञापन


श्री बाबा गंगा नाथ मंदिर के पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि छठ महापर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है जो चार दिन तक चलता है। बिहार और पूर्वांचल राज्यों के लोग पिछले कई सालों से श्रीवासुदेव तीर्थ मंदिर के सरोवर पर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक छठ पर्व मनाते हैं। छठ पर्व को सूर्य छठ भी कहा जाता है क्योंकि सूर्यदेव रोशनी के साथ ही ऊर्जा भी प्रदान करते हैं जिससे वर्ष में एक बार विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना हो जाती है।

चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व इस बार 25 नवंबर से नहाय-खाय के साथ प्रारंभ होगा। इस दिन व्रत रखने वाले गंगा जल समेत नदियों में डुबकी लगाकर चूल्हे पर आम की लकड़ी से खाना बनाएंगे जिसमें देसी घी और सेंधा नमक प्रयोग होता है। इसी दिन छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली सारी सामग्री की खरीदारी भी की जाती है। इसके बाद 26 अक्तूबर को खरना होगा। 27 अक्तूबर को छिपते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा इसके बाद 28 अक्तूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होगा।
विज्ञापन






पहले दिन

छठ व्रत की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को छठ पर्व के पहले दिन नहाय खाय से किया जाता है। छठ व्रती नदी, तालाब या अन्य किसी जलाशय में स्नान कर इसकी शुरुआत करती हैं। इसके पहले घर की साफ सफाई कर ली जाती है। नहाय-खाय के दिन अरवा चावल, चने की दाल और कदू की सब्जी का प्रसाद बनाया जाता है जिसमें सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रसाद लोगों के बीच वितरित भी किया जाता है और यही से छठ पर्व की शुरुआत होती है।



दूसरा दिन

छठ पर्व के दूसरे दिन को खरना के रूप में जाना जाता है। इस दिन से छठ व्रती का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। पहले सुबह से ही व्रती अन्न जल त्याग कर भगवान भास्कर की आराधना करने लगते हैं। शाम के समय अरवा चावल, दूध, गुड़, खीर आदि का प्रसाद बनता है तथा भगवान भास्कर को अर्पित करने के बाद व्रती अल्प प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस दिन निर्जला उपवास की शुरुआत हो जाती है।



तीसरा दिन

छठ पर्व का तीसरा दिन सबसे कठिन होता है। इस दिन छठ व्रतियों के निर्जला उपवास का दूसरा दिन प्रारंभ हो जाता है और इसी दिन छठ व्रती के द्वारा पूजा के दौरान इस्तेमाल में लाया जाने वाला ठेकुआ सहित अन्य प्रसाद भी बनाया जाता है। इसी दिन शाम के वक्त लोग छठ घाट जाते हैं और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।



चौथा दिन

छठ पर्व का चौथा दिन कार्तिक मास शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को होता है। इस दिन अहले सुबह भगवान भास्कर के उदीयमान स्वरूप को अर्घ्य दिया जाता है। सुबह के वक्त भी लोग छठ घाट पहुंचते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके बाद छठ व्रतियों के द्वारा पारण किया जाता है तथा छठ का व्रत खोल दिया जाता है। इसी के साथ छठ पर्व का समापन भी हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें