अमरोहा के वासुदेव स्थित सरोवर में खड़ी होकर डूबते सूरज की पूजा करतीं व्रती महिलाएं। संवाद
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अमरोहा। पहिले पहिले हम कइनी छठी मैया वरत तोहार, करिहा क्षमा छठी मइया, भूल-चूक गलती हमार... आदि लोक गीतों से सोमवार को वासुदेव तीर्थ मंदिर सरोवर और ब्रजघाट में गंगा का किनारा गूंज उठा। छठी व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। इस दौरान महिलाओं व पुरुषों ने छठ मैया से सुख समृद्धि की कामना के साथ संतान प्राप्ति की मनोकामना की। पूजा के समय बड़ी संख्या में बिहार प्रांत व पूर्वांचल के लोग मौजूद रहे।
इस दौरान महिलाओं ने फलों व हरी सब्जियों का दान किया। महिलाओं ने सोमवार की तड़के जल्द जागकर भजन-पूजन किया। विभिन्न प्रकार के फल व हरी सब्जियां, गन्ने आदि को पूजन में साथ रखा। शाम के समय वासुदेव मंदिर स्थित सरोवर पर एकत्र व्रत रखने वाली महिलाओं का जुटना शुरू हो गया। निर्जला व्रत रहीं महिलाएं परिजनों संग छठ मैया का गीत गाते हुए सरोवर घाट पर एकत्र हुईं। वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने के साथ गन्ने को खड़ा कर कलश स्थापित कर पूजन-अर्चन में व्यस्त हो गईं। जैसे ही सूर्यास्त का समय नजदीक आया, व्रती महिलाएं पानी में जाकर खड़ी होकर सूर्य उपासना में लीन हो गईं। यहां दूध और गंगाजल से सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
छठ पर्व : महिलाओं ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य
गजरौला। औद्योगिक इकाइयों में पूर्वांचल व बिहार राज्य के 25 सौ लोग काम करते हैं। जिनके द्वारा छठ मनाई जाती है। छठ पर्व के तीसरे दिन सोमवार को विभिन्न प्रकार के फलों की टोकरी लेकर समय से ही गंगा तट पर पहुंच गए। यहां महिलाओं ने निर्जला व्रत रख कर गंगा तट पर पूजा की। डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। दिन भर छठ मैया के भजन गाए। पूर्वांचल निवासी अशोक राय ने बताया कि मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देंगी।