अमरोहा में रात्रि 10:20 पर सीएचसी में नहीं मिले डॉक्टर।
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कहने के लिए मरीजों को सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए जिला अस्पताल के अलावा जिले में आठ सीएचसी, पचीस पीएचसी और चार अरबन पीएचसी हैं। जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो मरीजों को रात में सरकारी इलाज के भटकना पड़ता है। गुरुवार की रात अमर उजाला की टीम ने जिले की कुछ सीएचसी और पीएचसी का जायजा लिया। जहां हालात बता रहे हैं कि रात में इलाज के लिए मरीज को जिला अस्पताल जाना होगा वरना इलाज के लिए सुबह आठ बजे का इंतजार करना होगा। वजह साफ रात में सीएचसी पर ताले जड़े होते हैं। अगर कोई सीएचसी खुली मिल गई तो वहां स्टाफ नहीं मिलेगा। जबकि रात में सरकारी अस्पताल खुलने के निर्देश हैं। बावजूद इसके न तो सीएचसी-पीएचसी परिसर में बने आवास में कोई रहता है और न ही रात में अस्पताल खुलता है।
लावारिस मिली जोया सीएचसी हाईवे पर कब किस समय हादसा हो जाए पता नहीं। बावजूद इसके गुरुवार रात दस बजे जोया सीएचसी लावारिस हालत में मिली। अस्पताल खुला था लेकिन न तो डाक्टर का पता था और न ही स्टाफ। अलबत्ता वार्ड में दो मरीज बिना चादर बिछी बेड पर सोए मिले।
दोपहर में ही बंद हो जाती है ढबारसी सीएचसी
32 बेड की ढबारसी सीएचसी रात में खुलना तो दूर दोपहर में ही बंद हो जाती है। शाम छह बजे अस्पताल के गेट पर ताला लगा था। अस्पताल में अंधेरा छाया था। कोई कर्मचारी नजर नहीं आया। जबकि इस क्षेत्र में बीस किमी तक की दूरी में न तो कोई अस्पताल है और न ही कोई प्राइवेट डाक्टर।
पांच बजे नौगांवा सीएचसी परिसर में सन्नाटा ः
नौगांवा सादात। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवा सादात तीस बेड का है। यहां सीएचसी परिसर में दोपहर बाद सन्नाटा पसर जाता है। गुरुवार शाम पांच बजे अस्पताल परिसर में कोई नहीं मिला।
जबकि यहां डाक्टरों और स्टाफ के रहने के लिए सरकारी आवास बने हुए हैं। बावजूद इसके न तो कोई आवास में रहता है और न ही अस्पताल रात में खुलता है।