बवाल के बाद संभल जाने की तैयारी में जुटे कांग्रेसियों को पुलिस ने घरों में ही नजरबंद कर लिया। उनके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी। कांग्रेसियों ने पुलिस की कार्रवाई को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया। हालांकि, घंटों नजरबंद रखने के बाद संभल नहीं जाने की शर्त पर पुलिस ने पाबंदी हटा दी। पुलिस की सख्ती के चले कांग्रेसी संभल नहीं जा सके।
संभल में 24 नवंबर को बवाल हो गया था। जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी। जबकि, कई लोग घायल हुए थे। हिंसा के बाद कई दलों के लोग संभल जाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने की तैयारी में जुटे हैं। लेकिन, माहौल बिगड़ने के डर से प्रशासन सतर्क है। सोमवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय के नेतृत्व में अमरोहा के पदाधिकारी भी संभल जाने की तैयारी में थे। लेकिन, जैसे ही पुलिस को इसकी भनक लगी तो सुबह छह बजे ही पुलिस ने जिलाध्यक्ष ओमकारा कटारिया, प्रदेश महासचिव सचिन चौधरी, प्रदेश सचिव चौधरी सुखराज सिंह और अमरोहा शहर अध्यक्ष फैज आलम राइनी ने समेत विभिन्न कार्यकर्ताओं को नजर बंद कर लिया।
जिलाध्यक्ष ओमकार कटारिया ने कहा कि घरों में नजर बंद करना असंवैधानिक व गैरकानूनी है। संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल संभल जाना चाहता था। हम लोग पीड़ितों से मिलकर उनका दुख दर्द बांटना चाहते हैं। लेकिन, योगी की पुलिस हमें घरों में नजरबंद करके लोगों का दुख दर्द बांटने से रोक रही है। यह हमारी निजता एवं स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना चाहता है। यह डरी हुई योगी और मोदी सरकार की तानाशाही है जो हमें अपने अधिकारों की आवाज उठाने से रोक रही है। योगी सरकार संवैधानिक मूल्यों का हनन कर रही है। पुलिस की पहरेदारी हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोक सकती।
हसनपुर में भी कांग्रेसियों को संभल जाने से रोका
हसनपुर। नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष छुनन भारती के आवास पर कार्यकर्ताओं को नजरबंद किया गया। इस दौरान नगर अध्यक्ष ने कहा कि अपने हक की बात कहने से रोका जा रहा है। सरकार द्वारा हठ धर्मिता की जा रही है। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष जयपाल सिंह जाटव, नगर उपाध्यक्ष यासीन खां, जिला उपाध्यक्ष राशिद सैफी, फरमान, प्रदेश सचिव अफसर अली खां आदि मौजूद रहे। सुबह सात बजे से लेकर शाम पांच बजे तक पुलिस ने कार्यकर्ताओं को नजरबंद किया।