अमरोहा। मोहल्ला घेर करम अली खां में सोमवार रात नातिया महफिल सजी। शाने मुजतबा नकवी के आवास पर रिजवान अब्बास की ओर से आयोजित महफिल में शायरों ने बारगाह-ए-रिसालत में कलाम पेश कर देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
रिजवान अब्बास ने पढ़ा, “ये मदह-ए-मुस्तफा है फजीलत के बाब में, सारी फजीलतें हैं रिसालत मआब में.., नौशा अमरोहवी ने कहा- हुब्बे हैदर की सनद उनको अता होती है, जिनके सीनों में बसी कर्ब-ओ-बला होती है। डॉ. लाडले रहबर ने पढ़ा- तब्सरा कौम पे करना है तो ये लाजिम है, पहले खुद अपना भी किरदार संवारा जाए।
शीबान कादरी ने कहा- दावा-ए-गुलामी उसी इंसां का बजा है, जो उम्र भर आका के तरीके पे चला है। जुबैर इब्ने सैफी ने कैसा करम सरकार किया, जहनों को बेदार किया... पेश किया। वसीम अमरोहवी ने पढ़ा, नात गोई के जो अरमां थे निकाले न गए, कितने जज्बे हैं जो अल्फाज में ढाले न गए। शानदार मुजतबा ने कहा, कुरान पढ़, जो करना है दीदार-ए-मुस्तफा, कुरान की आयतों में है सूरत रसूल की।
समर मुजतबा, शाने हैदर बेबाक, लियाकत अमरोहवी, फुरकान अमरोहवी, अशरफ फराज, ताजदार मुजतबा, नवाजिश नकवी, अरमान साहिल और शाहनवाज तकी समेत अन्य शायरों ने भी कलाम पेश किए। अध्यक्षता नौशा अमरोहवी ने और संचालन डॉ. लाडले रहबर ने किया। अंत में रिजवान अब्बास ने आभार जताया।