रहरा सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर औपचारिकता ही पूरी हो रही है। आलम यह है कि यहां न चिकित्सकों की तैनाती है और न ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा। गंभीर अवस्था में पहुंचे मरीजाें को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। मजबूरी में मरीज प्राइवेट में उपचार कराते हैं।
रहरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 50 से अधिक गांव आते हैं। इन गांवों के सैकड़ों मरीज इस सीएचसी पर ही निर्भर हैं। लेकिन, उनका दुर्भाग्य है कि उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीएचसी प्रभारी डाॅ. शशांक चौधरी के अलावा डा. सौरभ त्यागी, महिला चिकित्सक डॉ. जयश्री, डाॅ. इमरान, दंत चिकित्सक सुशील कुमार हैं। इसके अलावा छह स्टाफ नर्स, एक वार्ड बॉय है। जबकि, सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, एएनएम और रेडियोलोजिस्ट की कमी है। इनकी वजह से मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि मरीज को एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता है। तो उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। पैथोलॉजी लैब में भी जांच की उचित व्यवस्था नहीं है।
बिना रेडियोलॉजिस्ट के कैसे हो एक्स-रे
सीएचसी में एक्स-रे मशीन आई रखी है। जिसे एक माह बीत चुका है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट व एक्स-रे टेक्नीशियन की कमी की वजह से एक्स-रे मशीन अभी तक चालू नहीं हो पा रही है। जबकि, क्षेत्र के लोगों द्वारा कई बार मांग की जा चुकी है कि एक्स-रे मशीन को चालू किया जाए।
- सीएचसी में पहुंचने वाले मरीजों को उचित उपचार देने का पूरा प्रयास रहता है। जिस मरीज की गंभीर अवस्था होती है उसे ही रेफर किया जाता है। सीएचसी में कुछ स्टाफ एवं चिकित्सकों की कमी है। जिसके लिए कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। डा.शशांक चौधरी, प्रभारी सीएचसी रहरा।