अमरोहा। कोरोना काल में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए वेंटीलेटर और कंसंट्रेटर अस्पतालों में धूल फांक रहे हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी से रोजाना पांच से सात मरीज रेफर किए जा रहे हैं। ऐसे में जान बचाने की खातिर लोग निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने को मजबूर हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं।
कोरोना काल का वह दौर जब लोग ऑक्सीजन के लिए तरस गए थे। ऐसे में सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च करते हुए जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर के साथ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया कराए गए लेकिन समय बीतने के साथ धीरे-धीरे इन्हें बंद कर दिया गया। उस दौरान विभाग को 14 वेंटिलेटर और पांच एलपीएम वाले 164 व 10 एलपीएम वाले 159 कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए थे। तब इमरजेंसी में स्टाफ द्वारा ही इन्हें संचालित करा दिया गया था लेकिन इसके बाद से इनका उपयोग ही होना बंद हो गया है।
अब हालत यह है कि वेंटिलेटर व ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों को पीआईसीयू वार्ड में कैद कर दिया गया है। जिला अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक सभी वेंटिलेटर चालू अवस्था में हैं मगर स्टाफ की कमी होने के कारण इन्हें संचालित नहीं करा पा रहे हैं। वेंटिलेटर चलाने के लिए छह बेड के वार्ड में दो स्टाफ नर्स होनी चाहिए लेकिन स्टाफ नर्स की कमी है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित वार्ड में रखा गया है। वेंटिलेटर का संचालन नहीं होने से मरीज दिल्ली और मेरठ के लिए रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल से मेरठ के लिए रोजाना करीब पांच से सात गंभीर मरीज रेफर हो रहे हैं जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी वेंटिलेटर नहीं हैं जबकि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर धूल फांक रहे हैं।
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दूसरे अस्पतालों में हुआ वेंटिलेटर व ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों का उपयोग
कोरोना काल में जिला अस्पताल के लिए आए वेंटिलेटर का प्रयोग स्थानीय स्तर पर हुआ ही नहीं। जिला अस्पताल को एल वन श्रेणी में रखा गया था। कोरोना काल में सभी वेंटिलेटर मुरादाबाद व वेंक्टेश्वर यूनिवर्सिटी में भेज दिए गए थे। कोरोना बीतने के बाद अस्पताल को मिल गए।
ऑक्सीजन प्लांट चालू हालत में
जनपद में दस ऑक्सीजन प्लांट हैं जो सभी चालू हालत में हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इन प्लांटों से हर मिनट 4,696.7 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। ऑक्सीजन प्लांट चलाया जाता है, इसलिए कंसंट्रेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती। अस्पताल में आईसीयू नहीं है, इसलिए वेंटिलेटर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। आईसीयू बनने के बाद वेंटिलेटर का इस्तेमाल होने लगेगा। -डॉ. चरन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल