फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: अमरोहा मांग रहा ट्रॉमा सेंटर और चीनी मिल का विस्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को जिले के दौरे पर आ रहे हैं। ऐसे में जिले के लोगों और किसानों की निगाहें एक बार फिर उन घोषणाओं पर टिक गई हैं, जिनका इंतजार वर्षों से किया जा रहा है। इनमें गजरौला में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना और हसनपुर चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की घोषणा प्रमुख हैं।
विज्ञापन

दोनों योजनाओं का अमरोहा का लोग वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। वहीं दूसरी ओर जिले के गन्ना किसानों का करीब 39 करोड़ रुपये का भुगतान भी चीनी मिल पर बकाया है, जिससे किसानों की आर्थिक परेशानियां बढ़ी हुई हैं। अब मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जिले के लोगों को उम्मीद है कि गजरौला ट्रॉमा सेंटर, हसनपुर चीनी मिल विस्तार और गन्ना भुगतान जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर ठोस घोषणा या निर्णय होगा, जिससे जिले के लाखों लोगों और हजारों किसानों को राहत मिल सके।

ट्रॉमा सेंटर नहीं बनने से गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर
गजरौला क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर की मांग लंबे समय से उठती रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण यहां अक्सर सड़क हादसे होते हैं, लेकिन गंभीर घायलों के इलाज के लिए अभी तक आधुनिक ट्रॉमा सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर मरीजों को मेरठ या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होने के साथ कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती है। क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा कई बार शासन स्तर पर ट्रॉमा सेंटर की मांग उठा चुके हैं। प्रशासन की ओर से ट्रॉमा सेंटर के लिए भूमि का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक परियोजना को मंजूरी नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन


हसनपुर चीनी मिल विस्तार की घोषणा भी अधूरी
जिले के गन्ना किसानों को हसनपुर चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ने का भी लंबे समय से इंतजार है। मुख्यमंत्री की ओर से पूर्व में मिल विस्तार की घोषणा की गई थी, ताकि क्षेत्र के किसानों का गन्ना समय पर पिस सके और उन्हें लंबा इंतजार न करना पड़े। हालांकि वर्षों बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। क्षमता बढ़ने से किसानों का समय बचेगा, परिवहन खर्च कम होगा और गन्ने की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी।
विज्ञापन

-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें