सात साल की बच्ची को अगवा करने के जिस आरोपी धीरज (30) को पुलिस ने पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था, वह जिला अस्पताल से हथकड़ी समेत भाग गया। पैर में गोली लगने के बाद दौड़ने से असमर्थ बदमाश के फरार होने पर एसपी आदित्य लांग्हे ने रहरा थाने के इंस्पेक्टर अशोक कुमार वर्मा, दरोगा अनूप सिंह, कांस्टेबल सुनील कुमार और कपिल कुमार को निलंबित कर दिया। बंबूगढ़ चौकी इंचार्ज की तहरीर पर इंस्पेक्टर को छोड़कर शेष तीन पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। करीब 16 घंटे बाद फरार धीरज को फिर गिरफ्तार कर लिया गया।
रहरा थानाक्षेत्र के गांव बांसका कलां निवासी नाजमीन की सात वर्षीय बेटी सोफिया का एक दिसंबर की दोपहर तब अपहरण कर लिया गया था, जब वह घर से कुछ दूरी पर चाऊमीन लेने गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर धीरज के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 11 दिसंबर तक पुलिस उसे गिरफ्तार न कर सकी, न ही बच्ची को तलाश सकी थी। सोमवार (12 दिसंबर) की रात नौ बजे धीरज को रहरा थाने की पुलिस ने अरावली मार्ग से दबोचा और उसकी निशानदेही पर बच्ची तक पहुंच गई थी। बच्ची को परिजनों के हवाले कर दिया था।
पुलिस के मुताबिक चेकिंग के दौरान बाइक सवार धीरज ने भागने की कोशिश की थी। रोकने पर गोली चलाई तो पुलिस की जवाबी फायरिंग में धीरज के पैर में गोली लगी और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया था।
गोली से घायल धीरज को अस्पताल में भर्ती कर रहरा थाने के दरोगा और दो सिपाही उसकी निगरानी में लगाए गए थे। कहा जा रहा है कि तीनों पुलिस कर्मी सो गए तो मंगलवार भोर में चार बजे धीरज मय हथकड़ी के फरार हो गया। गोली से पैर जख्मी होने के बावजूद बदमाश के फरार होने से हुई किरकिरी के बाद एसपी ने पूरे जिले की नाकेबंदी कराई। चेकिंग के बीच डिडौली पुलिस रात आठ बजे उसे फिर गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई। पुलिस ने बताया कि उसे जोया में संभल चौराहे से दबोचा गया। तब तक वह हथकड़ी खोल चुका था। हथकड़ी की तलाश जारी है।
तीन नाम, 50 हजार का इनामी
पुलिस को कदम-कदम पर चकमा देने वाला धीरज जगह के हिसाब से अपने नाम बदल लेता है। पुलिस के मुताबिक बदमाश का नाम धीरज उर्फ अजय उर्फ इमरान है। बच्ची के अपहरण बाद गिरफ्त में न आने पर उसे 50 हजार का इनामी बदमाश घोषित किया गया था।