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अमरोहा : किसान की हत्या में चार को आजीवन कारावास

Fri, 28 Nov 2025 02:47 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। संभल के ईसापुर सुनवारी निवासी बाइक सवार किसान राजीव शर्मा की गोली मारकर हत्या करने में कोर्ट ने दोषी गांव के ही पूर्व प्रधान के पति कुंवरपाल, विकास, सोमपाल व विजेंद्र को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कुंवरपाल व विकास चाचा-भतीजे हैं। चारों पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषियों ने चुनावी, जमीन की रंजिश और जानलेवा हमले के केस में फैसला नहीं करने पर षड्यंत्र रचकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। कोर्ट का फैसला आने के बाद चारों दोषियों को जेल भेज दिया गया है।
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यह सनसनीखेज वारदात आदमपुर थानाक्षेत्र में हुई थी। संभल के नखासा थानाक्षेत्र के ईसापुर सुनवारी गांव निवासी उमराव शर्मा के बेटे जयदेव शर्मा 25 फरवरी 2022 को भाई राजीव शर्मा व गांव के ही सोमपाल के साथ पड़ोसी भगवान शरन की बेटी प्रियंका की हत्या के मुकदमे में फैसले के लिए पूर्व विधायक के मकान पर चल रही पंचायत में शामिल होने हसनपुर आए थे। शाम करीब पांच बजे जयदेव शर्मा, राजीव शर्मा व सोमपाल बाइक से आदमपुर क्षेत्र के ढबारसी से होकर गांव जा रहे थे। उनकी बाइक पांडली से सिरसा रोड पर पहुंची तो एक बाइक पर सवार दो बदमाश आए और राजीव शर्मा के पेट में गोली मार दी।

इस पर राजीव शर्मा बाइक से उतरकर खेत की ओर भागे तो दोनों अभियुक्तों ने उन्हें पकड़कर पेट और कनपटी पर दो और गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। जयदेव शर्मा ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान ईसापुर सुनवारी गांव के ही सोमपाल, कुंवरपाल, विकास व विजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया था। चोरों ने षड्यंत्र रचकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। हत्या के समय सोमपाल पीड़ित परिजनों का हमदर्द बनकर उनके साथ रहने का दिखावा करता रहा था जबकि चाचा-भतीजे विकास व कुंवरपाल ने गोली दागी थीं।
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पुलिस ने सोमपाल, कुंवरपाल, विजेंद्र व विकास को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। चारों जमानत पर जेल से बाहर थे। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम की अदालत में चल रही थी। बुधवार को कोर्ट ने मुकदमे में सुनवाई कर साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर सोमपाल, कुंवरपाल, विजेंद्र और विकास को दोषी करार दिया। साथ ही चारों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था।

बृहस्पतिवार को कोर्ट ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई के लिए करीब 4.10 बजे दोषी सोमपाल, कुंवरपाल, विजेंद्र और विकास कोर्ट में पेश किया गया। करीब 15 मिनट दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं कुंवरपाल व उसके भतीजे विकास पर आर्म्स एक्ट में पांच-पांच हजार अतिरिक्त रुपये से दंडित किया गया है।
दोषियों ने इसलिए खेला खूनी खेल
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि राजीव शर्मा ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति से सोमपाल के नाम 56 लाख रुपये की जमीन करा दी थी। इसके बाद सोमपाल उस जमीन की राजीव शर्मा के नाम रजिस्ट्री नहीं कर रहा था। वहीं, कुंवरपाल और विकास आपस में चाचा-भतीजे हैं। कुंवरपाल की पत्नी व बड़ा भाई ग्राम प्रधान रहे हैं लेकिन साल 2021 में राजीव शर्मा ने खुद ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा था।

इसके चलते कुंवरपाल के परिवार से प्रधानी चली गई और गांव का ही तीसरा व्यक्ति ग्राम प्रधान बन गया। इसी बात को लेकर कुंवरपाल और उसका भतीजा विकास राजीव शर्मा से रंजिश रखने लगे थे जबकि विजेंद्र ने राजीव शर्मा पर जानलेवा हमला किया था और वह इस केस में फैसला नहीं कर रहे थे। इसलिए विजेंद्र भी उनसे रंजिश रखता था। इन्हीं रंजिशों को लेकर चोरों ने राजीव शर्मा की हत्या की पटकथा लिख डाली और षड्यंत्र के तहत योजना बनाकर हत्या कर थी।
दोषियों को सजा होते ही भावुक हुईं किसान की पत्नी-बहन, बोलीं- मिल गया इंसाफ
अमरोहा। किसान राजीव शर्मा की हत्या के करीब छह माह बाद सोमपाल, कुंवरपाल, विजेंद्र व विकास को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। जमानत पर छूटने के बाद चारों दोषियों ने सजा से बचने के लिए हर तरीके के हथकंडे अपनाए। राजीव की पत्नी कांता को जमीन वापस करने और 50 लाख रुपये तक का प्रलोभन दिया जबकि उनकी बहन गीता को गवाही नहीं देने के लिए धमकाया गया।

जान की परवाह किए बगैर ननद-भाभी इंसाफ के लिए लड़ती रहीं। धमकी मिलने के बाद राजीव शर्मा की बहन गीता ने पोर्टल पर शिकायत की और न्यायालय में भी प्रार्थनापत्र दिया था। कोर्ट के निर्देश पर गीता को सुरक्षा दी गई और कड़ी सुरक्षा के बीच उनकी गवाही कराई गई। बृहस्पतिवार को दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली तो नंद गीता और भाभी कांता के आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। राजीव शर्मा की पत्नी और बहन बोलीं- आज इंसाफ मिल गया। दोनों चाहती है कि चारों हत्यारे जीवन भर जेल में रहें।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में कड़ी रही सुरक्षा

बृहस्पतिवार को राजीव की हत्या में सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। चारों दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया। इस दौरान सुरक्षा के लिहाजा से चारों दोषियों को न्यायालय के बाहर तक कैदी वाहन से लाया गया जबकि सजा का फैसला आने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें पैदल हवालात तक ले जाया गया।
कोर्ट के बाहर लग रही दोषियों के परिजनों की भीड़
बुधवार को सोमपाल, कुंवरपाल, विजेंद्र और विकास को न्यायालय ने हत्या में दोषी पाते हुए हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। बृहस्पतिवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। इसकी भनक जैसे ही दोषियों के परिजन व रिश्तेदारों को हुई तो सुबह से ही कचहरी में उनका जमावड़ा लगना शुरू हो गया। चारों दोषियों को कोर्ट में पेश करने से पहले और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद तक बड़ी संख्या में कोर्ट के बाहर लोगों की भीड़ रही।
160 पेज की चार्जशीट... 221 तारीख, 12 गवाह और 60 पेज में फैसला
अमरोहा। किसान राजीव शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने विवेचना के दौरान मजबूत साक्ष्यों के साथ 160 पेज का आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। तीन साल में करीब 221 तारीखें पड़ीं और मृतक की पत्नी कांता व बहन गीता समेत 12 लोगों ने कोर्ट में अपनी गवाही दी।

हाईकोर्ट ने दोषियों को सशर्त जमानत दी थी। साथ ही निचली अदालत को जल्द सुनवाई पूरी कर निर्णय देने का आदेश दिए थे। एफएसएल रिपोर्ट में भी दोषियों के कब्जे से बरामद तमंचे से चली गोली और मृतक के घाव से बरामद बारूद का मिलन हो गया था। दंड के प्रश्न पर बृहस्पतिवार को कोर्ट में दोषियों के पेश होने के बाद सिर्फ 15 मिनट में सुनवाई पूरी कर दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना दी। एफएसएल रिपोर्ट भी दोषियों को सजा दिलाने में अहम सबूत बनीं।

राजीव शर्मा तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। संजय व जयदेव शर्मा छोटे हैं। घटना के समय सोमपाल योजना के तहत राजीव शर्मा को पंचायत में बुलाकर लेकर आया था। लौटते समय सोमपाल और विजेंद्र के इशारे पर ही कुंवरपाल व उसके भतीजे विकास ने राजीव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जानकारी होने पर राजीव के परिजन मौके पर पहुंचे थे लेकिन दोषी सोमपाल ने परिवार वालों को एहसास तक नहीं होने दिया कि हत्या में उसका भी हाथ है।

सोमपाल ही राजीव शर्मा के भाई जयदेव को थाने लेकर पहुंचा था और अज्ञात में एफआईआर दर्ज कराई थी। राजीव परिवार के चहेते व राजनीति में पकड़ रखते थे। यही वजह है कि उन्होंने साल 2021 में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा था। राजीव के छोटे जयदेव सीधे स्वभाव के हैं। इसी का ही फायदा उठाकर सोमपाल ने मर्जी के मुताबिक केस दर्ज कर दिया था लेकिन आठ दिन बाद राजीव की पत्नी कांता ने सोमपाल, कुंवरपाल व विजेंद्र के खिलाफ दूसरी तहरीर दी थी।

पुलिस ने गांव में चल रही रंजिश की कड़ी पर विवेचना की तो राजीव हत्याकांड से पर्दा उठ गया। इसके बाद पुलिस की विवेचना में चौथे अभियुक्त के रूप में विकास को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में चारों दोषियों ने जुर्म कबूल कर लिया था। यह भी स्पष्ट हो गया था कि गोली चलाने वाले कोई और नहीं बल्कि चुनावी रंजिश रखने वाले कुंवरवाल और उसका भतीजा विकास थे। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर दो तमंचे बरामद किए थे।

दोनों तमंचे को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया। इसमें मृतक राजीव शर्मा के घाव पर मिली बारूद और तमंचे से निकली गोली की बारूद एक पाई गई। बाद में पुलिस ने मजबूत साक्ष्यों के साथ 160 पेज की चार्जशीट सोमपाल, कुंवरपाल, विजेंद्र और विकास के खिलाफ न्यायालय में दाखिल की थी। करीब तीन साल चली सुनवाई के बीच राजीव शर्मा की पत्नी कांता, बहन गीता, दोनों भाई जयदेव व संजय के अलावा मुकदमे के दो विवेचक समेत 12 लोगों ने न्यायालय के सामने अपनी गवाही दी। गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोषियों ने जमानत याचिका दायर की तो न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया जिसके बाद चारों दोषियों ने हाई कोर्ट की शरण ली थी।
राजीव के पास होती लाइसेंसी रायफल तो बच सकती थी जान :
राजीव शर्मा को अपनी जान का खतरा रहता था। इसलिए वह अपनी सुरक्षा के लिए लाइसेंसी रायफल हमेशा साथ रखते थे। हालांकि, घटना के कुछ दिन पहले विधानसभा चुनाव के चलते रायफल जमा हो गई थी। घटना के समय यदि उनके पास रायफल होती तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
बहन गीता अभी भी जता रही जान को खतरा :
भाई राजीव शर्मा हत्याकांड में न्यायालय के फैसला आने के बाद भी बहन गीता डरी सहमी दिखी। उसने अभी भी अपनी जान को खतरा बताया है। जिस समय सजा सुनाई गई, उस समय राजीव की पत्नी कांता देवी व बहन गीता कोर्ट में मौजूद नहीं थी। वह अपने अधिवक्ता के चेंबर पर थीं। जैसे ही फैसला आया तो उनकी आंखें नम हो गईं। कोर्ट ने चारों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
फूट-फूट कर रोया कुंवरपाल सोमपाल और विजय के आंखों में भी दिखे आंसू
अमरोहा। बृहस्पतिवार को जैसे ही कड़ी सुरक्षा के बीच हत्या के दोषी कुंवरपाल, सोमपाल, वीरेंद्र और विजय को न्यायालय लाया गया तो कोर्ट के बाहर परिजनों की भीड़ देखकर कुंवरपाल फूट-फूट कर रोने लगा जबकि सोमपाल और विजय की आंखों में भी आंसू थे लेकिन विजेंद्र को कोई पछतावा नहीं था।

क्योंकि उसकी आंखों से न तो आंसू दिखे और न चेहरे पर पछतावा दिखाई दिया। मुस्कुराते विजेंद्र को देखकर कोर्ट में मौजूद हर कोई अचंभित था। न्यायालय के द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद जैसे ही चारों दोषियों को पुलिस जेल लेकर जाने लगी तभी उनके परिजनों में चींखपुकार मच गई। संवाद
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