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Amroha News: सरसों के रतुआ रोग से बचाव को जारी की एडवाइजरी

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अमरोहा। खेतों में इस समय सरसों की फसल लहलहा रही है, लेकिन तापमान में दिनोंदिन हो रही गिरावट से सरसों में सफेद रतुआ रोग यानी व्हाइट रस्ट का खतरा भी मंडराने लगा है। फसल में बीमारी की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने इससे बचाव को किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
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मौसम में बदलाव के साथ लगातार पाले और तापमान में गिरावट सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। कोहरे के बने रहने से सरसों की फसल में व्हाइट रस्ट यानी रतुआ रोग का खतरा भी बढ़ गया है। इस रोग में पत्तों के निचले भाग में सफेद धब्बे से दिखाई देने लगते हैं और सफेद पाउडर सा बन जाता है। इसका प्रकोप बढ़ने पर यह पत्तों के बाद तने से होती हुई फलियों तक पहुंच जाती है, जिससे फसल प्रभावित होने लगती है। पौधे की टहनी टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती है और बढ़वार भी रुक जाती है। जिसके बाद वह मोर के पंजे की तरह आकार लेने लगती है। इस अवस्था में आने के बाद फलियां बननी बंद हो जाती है। पत्ते और तने के प्रभावित होने के बाद पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी प्रभावित होने लगती है, और फसल का नुकसान भी बढ़ जाता है। रोग की बढ़ती संभावना को देखते हुए कृषि विभाग की और से भी सरसों की फसल के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
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ऐसे करें रोकथाम
उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) मुरादाबाद मंडल प्रशांत कुमार बताते हैं कि इस रोग से बचाव के लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। यह रोग एल्बुगो कैंडिडा नामक फफूंद से होता है, जो एक ऊमाइसीट है। निरंतर कोहरे के संपर्क में आने के कारण इस रोग का प्रभाव बढ़ जाता है। रोग के बचाव के लिए उन्होंने बताया कि फसलों की नियमित देखभाल करनी चाहिए। फसल में रोग का असर दिखाई देने पर मेटालैक्सिल एम आठ प्रतिशत व मैन्कोजेब 64 प्रतिशत डब्ल्यूपी ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव करना चाहिए।
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