रजबपुर(अमरोहा)। प्रसिद्ध कथावाचक संत आचार्य सुधांशु जी महाराज ने कहा कि विद्यार्थी जीवन पूर्ण विद्यार्जन और सर्वांगीण विकास का समय है। इस दौरान छात्राओं को पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी दक्षता हासिल करनी चाहिए। विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए, क्योंकि यही परिस्थितियां व्यक्ति में नेतृत्व के गुण विकसित करती हैं। वह सोमवार को गुरुकुल परिसर में छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।
आचार्य सुधांशु जी महाराज ने गुरुकुल परिसर में यज्ञ में शामिल हुए। नवरात्र के आरंभ पर उन्होंने बालिकाओं को मां शैलपुत्री का स्वरूप मानकर पुष्पवर्षा की। इसके बाद गुरुकुल का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने छात्राओं के गुणवत्तापूर्ण संप्रेषण की सराहना की। महाराज ने गुरुकुल के वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां की विशेषता ईंट-पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि यहां का आभामंडल है, जो तपस्या और भावनाओं से निर्मित हुआ है।
उन्होंने गुरुकुल की प्राचार्या डॉ. सुमेधा को ऋषिका के समान बताते हुए शिक्षा और समाज के लिए उनके गरिमामय योगदान को नमन किया। उन्होंने छात्राओं को निष्क्रिय मनोरंजन के बजाय सक्रिय मनोरंजन अपनाने की प्रेरणा दी। कहा कि विद्यार्थियों का मनोरंजन भी ऐसा होना चाहिए, जिससे उनके ज्ञान और जानकारी में वृद्धि हो। छात्राओं को नई विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त कर कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने तथा आत्मानुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। इससे पहले प्राचार्या डॉ. सुमेधा ने सभा के आरंभ में गुरुकुल का परिचय कराया। उन्होंने छात्राओं के लिए दिए गए जीवनोपयोगी संदेशों की सराहना की और आचार्य सुधांशु जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभा का समापन किया।