उन्होंने कहा कि बाहर की पवित्रता का ध्यान तो हर कोई रखता है लेकिन यहां आंतरिक पवित्रता की बात है। आंतरिक पवित्रता तभी घटित होती है जब मनुष्य लोभ से मुक्त होता है। शौच धर्म कहता है कि आवश्यक्ता, आकांक्षा, आसक्ति और अतृप्ति के बीच को समझकर चलना होगा। क्योंकि जो अपनी आवश्यकताओं को सामने रखकर चलता है। वह कभी दुखी नहीं होता और जिसके मन में आकांक्षाएं हावी हो जाती हैं। वह कभी सुखी नहीं होता। शाम को आरती, बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस दौरान अध्यक्ष योगेश कुमार जैन, महामंत्री शरद कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, राजेश जैन, सौरभ जैन, अमित जैन, लता जैन, रजनी जैन, मीनाक्षी जैन, हिमांशी जैन, रेखा जैन एवं श्री पार्श्वनाथ युवा मंडल मौजूद रहे।