अमरोहा। नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं को बंधक बनाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। शुरुआती जांच में गिरोह का नेटवर्क उत्तराखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, असम, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों तक फैला मिला है। पुलिस के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड संदीप सोशल मीडिया के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता था।
शुक्रवार को गजरौला पुलिस ने भारत एसोसिएट नाम से संचालित फर्जी कंपनी पर छापा मारकर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया और 15 युवकों को मुक्त कराया। मौके से सात मोबाइल, एक लैपटॉप, 20 आवेदन पत्र, कूटरचित स्टांप पेपर, रजिस्टर, डायरी और 39,500 नकद बरामद हुए।
पुलिस के अनुसार गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर नौकरी के विज्ञापन डालकर युवाओं को गजरौला बुलाता था। उनसे रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग और सिक्योरिटी के नाम पर 15 से 30 हजार रुपये वसूले जाते थे। बाद में नेटवर्क मार्केटिंग और मनी सर्कुलेशन स्कीम से जुड़ने का दबाव बनाया जाता था। विरोध करने वालों को बंधक बनाकर मारपीट, धमकी और मानसिक उत्पीड़न किया जाता था।
पुलिस ने अनुज, अरुण शर्मा, फहीम अहमद, चंद्रपाल, रूपेंद्र कुमार, अजीत चौधरी, राजेंद्र सिंह, अभिषेक कुमार और रोहित सिंह को जेल भेज दिया है। एएसपी अखिलेश भदौरिया ने बताया कि मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर ठगी के शिकार युवाओं की पहचान कर उन्हें विवेचना में शामिल किया जाएगा।
डायरी बनी पुलिस की सबसे बड़ी कड़ी
आरोपियों के ठिकाने से बरामद डायरी में कई राज्यों के युवाओं के नाम, मोबाइल नंबर और लेनदेन का पूरा ब्यौरा दर्ज मिला है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह देशभर के सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाने की तैयारी कर चुका था। अब डायरी में दर्ज लोगों से संपर्क कर संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है।
-
फेसबुक-इंस्टाग्राम से बिछाया ठगी का जाल
गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक नौकरी के विज्ञापन डालकर युवाओं को फंसाता था। इंटरव्यू, ट्रेनिंग और नौकरी का झांसा देकर उन्हें गजरौला बुलाया जाता और फिर मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस अब सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है।