85 years ago the Ganges stream used to flow 10 km away from Tigri
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करीब 85 साल पहले गंगा की मुख्यधारा तिगरी गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर बहती थी। समय के साथ अब गंगा तिगरी गांव के निकट से होकर बह रही है। बुजुर्गों का कहना है कि उस जमाने में कांकाठेर रेलवे स्टेशन से करीब 15 किलोमीटर पैदल चलकर वे गंगा मेले में पहुंचते थे। मौजूदा समय में गंगा के बांध से गंगा मेला साफ दिखाई देता है। अब मेला भी तिगरी से सटकर लगता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर ऐतिहासिक मेले का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है और प्राचीन काल से ही गंगा के दोनों तरफ मेले का आयोजन होना माना जाता है। मौजूदा समय में तिगरीधाम के मेले का आयोजन जिला प्रशासन करा रहा है। इससे पहले जिला पंचायत के द्वारा कराया जाता था। तिगरी के रहने वाले 90 वर्षीय गंगाराम सिंह बताते हैं कि वर्ष 1937 तक गंगा गढ़मुक्तेश्वर में स्थापित प्राचीन कालीन गंगा मंदिर की सीढ़ियों को छूते हुए बहती थी और इसी स्थान पर ही कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेला लगता था। इसके ठीक सामने ही गंगा के दूसरे छोर पर तिगरीधाम पर मेला आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगती थी। वक्त के साथ धीरे-धीरे गंगा अपना प्राचीन स्थान छोड़ती चली गई। अब गंगा मंदिर से गढ़ का मेला करीब 10 किलोमीटर दूर है और तिगरीधाम में गंगा इतनी ही दूर आई है। अब तिगरी गांव पहुंचते ही मेला शुरू हो जाता है, हालांकि कांकाठेर रेलवे स्टेशन से अधिकांश श्रद्धालुु पैदल ही तिगरीधाम कूच करते हैं। वैसे यहां अब सवारी का बंदोबस्त भी हो चुका है। जो पैदल नहीं चलना चाहते, वे किराया देकर थ्री व्हीलर, घोड़ा तांगा में बैठकर मेले पहुंचते हैं।