मंडी धनौरा। वर्ष 2005 से राजनीति का शिकार बने डींगरा बिजलीघर के चालू होने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में राजस्व परिषद में दायर वाद को न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा है कि यदि इस मामले में कोई स्थगनादेश जारी किया गया है तो वह भी निरस्त किया जाता है। न्यायालय के आदेश के बाद बिजली विभाग ने डींगरा बिजलीघर को शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डींगरा बिजलीघर को लेकर विधायक राजीव तरारा ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा था।
वर्ष 2005 में तत्कालीन विधायक देवेंद्र नागपाल ने कई गांवों के लोगों की मांग पर ग्राम डींगरा में बिजलीघर का निर्माण कराया था। बिजलीघर बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका था। लेकिन गांव के ही अब्दुल हमीद ने वर्ष 2008 में भूमि को वक्फ बोर्ड की बताते हुए राजस्व परिषद में वाद दायर कर दिया था। सांप्रदायिक राजनीति के चलते 10 साल तक न्यायालय में वाद चलता रहा। जनप्रतिनिधि इसे चालू कराने को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाते रहे। बीती 17 सितंबर को राजस्व परिषद न्यायालय में इस वाद पर सुनवाई हुई। अब्दुल हमीद की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। बार बार पुकार के बावजूद भी कोई उपस्थित नहीं होने पर सदस्य न्यायिक श्याम सुंदर शर्मा ने वाद खारिज कर दिया। वाद खारिज होते ही बिजलीघर के चालू होने का रास्ता साफ हो गया है। कई गांवों के लोगों ने इस पर खुशी जाहिर की है।
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डींगरा बिजलीघर के चालू होने से लगभग एक दर्जन से अधिक गांवों के बिजली व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। बिजलीघर को चालू कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल था। मुझे प्रसन्नता है कि न्यायालय ने जनहित को सर्वोपरि मानते हुए अपना निर्णय दिया है। राजीव तरारा, विधायक, मंडी धनौरा।
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न्यायालय का आदेश देर से ही लेकिन दुरूस्त आया है। डींगरा बिजलीघर के चालू होने से हर वर्ग व जाति के किसान को लाभ मिलेगा। जनहित के कामों में राजनीति ठीक नहीं है। भाकियू कार्यकर्ताओं के आंदोलन की मेहनत रंग लाई है। इसको चालू कराने में सभी के सहयोग के लिए आभार। डूंगर सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू