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तिगरी मेला के लिए अफसरों ने खींचा खाका, मेला स्थल का किया निरीक्षण

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मेला स्थल का किया निरीक्षण, गंगा का जलस्तर अधिक होने से घाट बनाने में दिक्कत
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
तिगरी गंगा मेले का खाका तैयार करने को अफसर जुट गए हैं। जिला पंचायत के इंजीनियर ने टीम के साथ मेला स्थल पर डेरा डाल दिया है। गंगा के दो नालों को पार कर बह रही मुख्य धारा में स्नान को श्रद्धालु पहुंचेंगे। यहां जलस्तर गहरा होने पर इंजीनियर घाटों का स्थान अभी तय नहीं कर पाए हैं। शुक्रवार को गंगा किनारे घाट पर करीब दो किमी तक गोताखोरों से जलस्तर की गहराई देखी, लेकिन तय नहीं हो पाया कि घाट का सही स्थान कहां होगा। इस वर्ष मेला स्थल की लंबाई बढ़ाई गई है। जबकि गंगा कटान की वजह से थोड़ी सी चौड़ाई कम की गई है। मेले का ब्लू प्रिंट भी तैयार किया जा रहा है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी में लगने वाला पौराणिक तिगरी मेला इस बार पच्चीस अक्टूबर से शुरू होगा। जिला पंचायत की ओर से मेला की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। शुक्रवार को जिला पंचायत के इंजीनियर भगत सिंह और अवर अभियंता सुभाषचंद ने मेला स्थल पहुंच बारीकी से निरीक्षण किया। तिगरी की विशाल पौराणिक मेले का खाका खींचना शुरू किया गया। इस बार पहले के मुताबिक तिगरी मेला का ब्लू प्रिंट तैयार करने में इंजीनियर्स को थोड़ी सी दिक्कत आ रही है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से इसकी धार करीब 65-70 मीटर तक तिगरी की तरफ बढ़ गई है। जिसके चलते मेला स्थल की चौड़ाई पहले के मुताबिक थोड़ी कम करने की तैयारी की जा रही है। जबकि मेला की लंबाई पहले के मुताबिक काफी बढ़ाई गई है। पिछले वर्ष करीब सवा दो किमी तक तिगरी मेला की लंबाई की गई थी, लेकिन इस वर्ष चौड़ाई कम हो जाने की वजह से लंबाई को एक किमी तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस बार गंगा का जलस्तर बढ़ने से गंगा तिगरी तरफ हो गई और अब जलस्तर घट जाने से इसकी स्थिति खराब हो गई। श्रद्धालुओं को गंगा की मुख्य धारा तक पहुंचाने के लिए जिला पंचायत के इंजीनियर पूरी कोशिश कर रहे हैं। मेले में इस बार स्नान के लिए घाट बनाने में परेशानी आ रही है। मुख्य धारा में किनारे पर ही आठ से दस फीट तक पानी है। शुक्रवार को जिला पंचायत की टीम ने गोताखोरों की सहायता से करीब दो किमी तक गंगा की गहराई नापी गई। जलस्तर अधिक होने पर अभी कहीं पर भी घाट बनाने का स्थान निश्चित नहीं हो पाया है। इंजीनियर भगत सिंह का कहना है कि सप्ताभर में गंगा का जलस्तर दो से तीन फीट तक कम हो जाएगा। जिससे आसानी से घाट बनाए जा सकते हैैं।
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तीस फीट चौड़ी सुंदर सड़कें बनेंगी
मेला स्थल का जायजा लेते हुए तय किया मेला गंगा के टापू पर लगाया जाएगा। संशोधन यह रहेगा कि मेला पिछले साल की अपेक्षा डेढ़ गुना अधिक भाग में लगेगा। हर साल 21 व 25 फीट की चौड़ाई वाली सभी सड़कें 30 फीट की सुंदर तरीके से बनाई जाएगी ताकि आने जाने में श्रद्धालुओं व अधिकारियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं झेलनी पड़े। मेला स्थल पर अभी भी उड़द, धान व बाजरे की फसल खड़ी हैं। किसानों को दो चार दिन में ही फसलों को काटना होगा।
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