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सांसद की वादाखिलाफी व विकास नहीं होने पर दो गांवों के लोगों ने किया बहिष्कार

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वादों से मुकरे सांसद, दो गांवों में मतदान बहिष्कार
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी धनौरा।
क्षेत्र का विकास नहीं होने पर दो गांव के लोगों ने जिला पंचायत के वार्ड संख्या नौ के लिए उपचुनाव का बहिष्कार कर दिया। ग्रामीण सांसद की वादाखिलाफी से बेहद नाराज थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना होगा। मौके पर गए एसडीएम व सीओ ने ग्रामीणों को काफी समझाया।
जिला पंचायत के वार्ड संख्या नौ के अंतर्गत ग्राम विशावली, ढाकोवाली, जाटोवाली, शीशोवाली व सुलतानपुर आदि आते हैं। इन गांवों में खड़गवंशी जाति के लोग ही रहते हैं। ढाकोवाली व जाटोवाली गांव के लोगों ने बाहेनदी पर पक्के पुल का निर्माण व साल दर साल आने वाली बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया। गांव के बुजुर्ग रामप्रसाद ने आक्रोश में बताया कि पिछले साल भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर का कई गांवों के लोगों ने सम्मान समारोह किया था। समारोह में सांसद ने एक साल के भीतर बाहे नदी पर पुल का निर्माण व तटबंध निर्माण का वादा किया था। लेकिन उनका वादा झूठा निकला। चुनाव बहिष्कार की जानकारी होने पर गांव पहुचे एसडीएम संजीव यादव व सीओ जगवीर सिंह चौहान ने ग्रामीणों को काफी समझाया लेकिन वे नहीं माने। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि उनकी मांग शासन तक पहुंचा दी जाएगी। ग्रामीणों ने सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ढाकोवाली के मतदान केंद्र पर 950 वोट में दो बजे तक मात्र 70 वोट ही पड़ पाए थे। ये वोट भी शरीफपुर शुमाली गांव के लोगों के थे। चुनाव के बहिष्कार की जानकारी होने पर शेरपुर पहुंचे डीएम नवनीत सिंह चहल ने अधीनस्थों से जानकारी ली।
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- ढाकोवाली व जाटोवाली गांव के लोगों द्वारा मतदान के बहिष्कार की जानकारी हुई थी। एसडीएम व सीओ को मौके पर भेज कर ग्रामीणों को समझाया गया है। मतदान करना उनका अधिकार है। ग्रामीणों की समस्याओं के बारे में शासन को लिखा जाएगा।
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- नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी

आजादी के 70 साल बाद भी नारकीय जीवन के लिए अभिशप्त हैं ग्रामीण
मंडी धनौरा। आजादी के 70 साल बाद भी विकास नहीं होने से तहसील के बाहेनदी किनारे बसे खडगवंशी समाज के गांवों की हालत वास्तव में बेहद दयनीय है। विशावली, ढाकोवाली, जाटोवाली, सुलतानपुर, शीशोवाली, शरीफपुुर शुमाली आदि गांवों में आने जाने के लिए लोगों को दोनों ओर से बाहे नदी पार करनी पड़ती है। वाजिदपुर गांव व चकनवाला की ओर नदी है। नदी पार करने के लिए पैंटून का अस्थाई पुल बनाया गया है। बरसात के दिनों में नदी के तेज बहाव में पैंटून का पुल अक्सर बह जाता है। ग्रामीण आवागमन के लिए अपनी जान पर खेल कर इन पैंटून पुल का प्रयोग करते हैं। हर साल तीन-चार ग्रामीण नदी पार करने के चक्कर में अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। बरसों से ग्रामीण बाहे नदी पर पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन हर साल उनको सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। बरसात के दिनों में तिगरी गांव के कुछ मल्लाह अपनी नाव यहां बाहेनदी में ले आते हैं। नदी पार करने की एवज में प्रति ग्रामीण 20 रुपये की धनराशि वसूलते हैं। ग्रामीण कैलाश, सतवीर, महेंद्र, प्रेमचंद आदि का कहना है कि खेत नदी के दूूसरी ओर हैं। दिन में एक बार आने जाने में ही 40 रुपये खर्च हो जाते हैं। गरीब वर्ग के लोगों के लिए यह बड़ी राशि है। ग्रामीणों को दूसरा नुकसान बाढ़ के कारण होता है। नदी किनारे बसे इन गांवों में बरसात के दिनों में पानी गांव में घुस जाता है। फसल पूरी नष्ट हो जाती है। ग्रामीण काफी अरसे से शेरपुर से चकनवाला तक तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं। सपा सरकार में तत्कालीन मंत्री कमाल अख्तर ने लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी हुमैरा अख्तर के चुनाव लड़ने पर शेरपुर से दरबड़ ठेठ तक तटबंध का निर्माण करा दिया था।
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