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Amroha News: 61 प्रतिशत पद खाली, 20 डॉक्टरों के सहारे जिला अस्पताल

Thu, 07 Aug 2025 02:24 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा जिला अस्पताल में बुधवार को पर्चा बनाने के लिए लगी भीड़। संवाद - फोटो : संवाद
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अमरोहा। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। इससे मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में कुल 52 पदों के सापेक्ष 32 डॉक्टर के पद खाली हैं। सिर्फ 20 डॉक्टर के सहारे सैकड़ों मरीज के जीवन की डोर चल रही है।
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डॉक्टरों की कमी के चलते जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भटकना पड़ता है। इतना ही नहीं अस्पताल में छह महिला चिकित्सकों के पद भी खाली हैं। दिल के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां चेस्ट फिजिशियन और कॉर्डियोलॉजिस्ट के पद भी खाली है। इन बीमारियों से जुड़े मरीजों को रेफर किया जाता है।
महिला विंग में भी संविदा पर तैनात महिला चिकित्सक के सहारे सैकड़ों महिलाएं हैं। उन पर ओपीडी में आने वाली बीमार महिलाओं और गर्भवती के उपचार का जिम्मा है। रेडियोलॉजिस्ट का एक पद भी खाली होने से मरीजों अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। उन्हें तारीख पर तारीख दी जा रही है। करीब डेढ़ सौ मरीज अल्ट्रासाउंड करने की लाइन में लगे हैं। उन्हें अगली तारीख देकर लौटाया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी से निपटने के लिए एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग में शासन को पत्र लिखकर डॉक्टरों की मांग की है।
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जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने की डिमांड शासन को भेजता रहा है लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही निकलकर सामने आता है। चिकित्सकों की उपलब्धता की बात करें तो अस्पताल बनने के बाद आज तक यहां न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं और न ही चेस्ट फिजीशियन की तैनाती हुई है। अस्पताल में महिला चिकित्सकों के सात में से छह पद शुरुआत से अब तक खाली पड़े हैं। फिजीशियन के दो पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है।
चेस्ट फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। बाल रोग विशेषज्ञ दोनों पद भरे हैं। एनेस्थेटिक्स के दो पदों में एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के दो पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। रेडियोलॉजिस्ट के दो पदों में एक ही डॉक्टर हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ में स्वीकृत एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। ईएमओ के तीनों पर भरे हुए हैं लेकिन अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है वह भी खाली है। जबकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तैनात हैं।
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अल्ट्रासाउंड नहीं होने से मरीज परेशान
जिला अस्पताल में मरीजों के लिए मुफ्त अल्ट्रासाउंड की सुविधा हैं। एक अल्ट्रासाउंड मशीन महिला विंग में लगी है जबकि दूसरी जिला अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में है। महिला विंग के रेडियोलाॅजिस्ट नौकरी छोड़कर चले गए हैं जिसके बाद इमरजेंसी विंग के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विजयपाल पर यहां की भी जिम्मेदारी आ गई है। वह भी कई बार कानूनी प्रक्रिया के चलते बाहर रहते हैं। अल्ट्रासाउंड करने के लिए तारीख पर तारीख मिलने से मरीजों का दर्द बढ़ता जा रहा है। मजबूरी में मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच करानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में इन दोनों ढाई सौ से ज्यादा मरीज वेटिंग में हैं, लेकिन उनकी पीड़ा को कोई सुनने वाला नहीं है। अस्पताल में पेट दर्द का इलाज कराने पहुंचने वाले रोगियों या गर्भवतियों को बाद में अल्ट्रासाउंड कराने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है।
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स्टाफ नर्स ही संभाल रहीं जिम्मेदारी
महिला चिकित्सकों की कमी के कारण सरकारी अस्पतालों में स्टाफ नर्स ही गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी से लेकर जच्चा-बच्चा की सेहत की जिम्मेदारी संभाल रही हैं जबकि महिला मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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- जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। एक रेडियोलॉजिस्ट समेत कई डॉक्टर और महिला चिकित्सकों की डिमांड के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया हो है। हर माह डिमांड पत्र भेजा जाता है। शासन स्तर से डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। -डॉ. चरन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल
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