समाजवादी पेंशन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। पात्रों की बजाय अपात्र लोगों की पेंशन बना दी गईं। योगी सरकार द्वारा कराई जा रही जांच में इसका खुलासा हुआ है। जिले भर में पांच हजार से ज्यादा लोग फर्जी तरीके से पेंशन हासिल कर रहे थे। चिह्नित करने के बाद समाज कल्याण विभाग ने उनकी पेंशन को खत्म करने की कार्रवाई छेड़ दी है।
सपा सरकार के कार्यकाल में समाजवादी पेंशन शुरू की गई थी, जिसके तहत पात्र लोगों को पांच सौ रुपये प्रति माह के हिसाब से पेंशन दी जा रही थी। जनपद में 39 हजार 772 लोग लाभान्वित हो रहे थे, लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही यह पेंशन शक के दायरे में आ गई। योगी सरकार ने पेंशन पा रहे लोगों का सत्यापन कराने का फैसला लिया।
अब जब पेंशनधारकों की जांच की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। करीब 5462 अपात्र लोग पेंशन पा रहे थे। समाज कल्याण विभाग ने प्रत्येक तहसील के लेखपालों से जांच रिपोर्ट तलब की है। हैरानी की बात ये है कि पात्रों का चयन सपा सरकार में ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा कराया गया था, लेकिन भाजपा सरकार में सत्यापन की कार्रवाई लेखपालों द्वारा कराई जा रही है।
इसके पीछे सरकार का मकसद सच्चाई सामने लाना रहा है। चूंकि चयनकर्ताओं से ही सत्यापन कराया जाता तो उसमें गड़बड़ी का भी शक रहता। इसलिए अधिकारियों ने जांच का जिम्मा लेखपालों के हवाले कर दिया।