अमरोहा। जनपद में 4216 महिलाएं व युवतियां खून की कमी से जूझ रही हैं। इसकी पुष्टि 17 सितंबर से दो अक्तूबर तक चले महिलाओं के विशेष स्वास्थ्य शिविर में हुई है। इनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम मिली है। अब इनको चिह्नित कर नियमित उपचार कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इतना ही नहीं 350 से ज्यादा महिलाएं शुगर पीड़ित और 430 महिला व किशोरियों में बीपी की शिकायत मिली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर 17 सितंबर से शुरू अभियान के तहत जिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी में स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान चलाया गया। अभियान के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जननी सुरक्षा योजना, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच, गर्भनिरोधक साधनों का विकल्प, किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता पर परामर्श, एनीमिया की रोकथाम और प्रबंधन, राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन और टीबी मुक्त भारत जैसे विषयों पर कार्य किए गए थे।
एसएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान के दौरान एनीमिया से पीड़ित मिलीं महिलाएं एवं युवतियों नियमित उपचार की सलाह के साथ जागरूक किया जा रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना खून की कमी के मरीज आते हैं, जिनको दवाईं दी जाती है। उचित खानपान से खून की कमी दूर हो सकती है।
कम हो सकती है रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता
सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि एनीमिया एक सामान्य चिकित्सीय स्थिति है, इसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) की संख्या में कमी या रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी देखी जाती है। हीमोग्लोबिन आरबीसी में मौजूद एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से पूरे शरीर में विभिन्न ऊतकों और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। एनीमिया के कारण रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे शरीर का समग्र स्वास्थ्य और कामकाज प्रभावित होता है।
एनीमिया के लक्षण
सीएमओ ने बताया कि एनीमिया के मरीजों में थकान और कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, दिल की धड़कन का असामान्य होना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द के साथ चक्कर आना, हाथों और पैरों का ठंडा पड़ना, सिरदर्द जैसे लक्षण है।
तीन प्रकार का होता है एनीमिया
माइल्ड एनीमिया : इस प्रकार के एनीमिया में खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 9 से 11 तक होती है, जबकि महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 से 14 तक होनी चाहिए। अब तक हुई जांच में ऐसी तीन हजार से अधिक बच्ची, किशोरी व महिलाएं मिली हैं।
माॅडरेट एनीमिया : इस प्रकार के एनीमिया में खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 से 9 तक होती है। अब तक हुई जांच में ऐसी 950 बच्ची, किशोरी व महिलाएं सामने आई हैं।
सीवियर एनीमिया : यह सबसे घातक होती है। इसमें खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 से भी कम होती है। इसमें कई बार खून भी चढ़ाना पड़ता है। जांच में ऐसी 289 बच्ची, किशोरी व महिलाएं मिली हैं।
पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा आंकड़ा
जिले में पिछले चार वर्षों में गर्भवतियों में खून की कमी का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अप्रैल 2021 से 2022 तक 8,644 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिसमें 440 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिह्नित की गईं थीं। अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक 12,524 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 778 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिह्नित की गईं थी। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 15,601 गर्भवतियों की जांच की गई। जिनमें 1467 उच्च जोखिम वाली मिली थीं। अप्रैल 2024 से अब तक करीब 13322 गर्भवती की जांच की गई, जिसमें 1790 गर्भवती उच्च जोखिम वाली मिलीं।
वर्जन
जिला अस्पताल में रोजाना खून की कमी के मरीज आते हैं, जिनको दवाईं दी जाती है। गर्भवतियों में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम खाएं। फल सब्जी खाएं, बाहरी खाना खाने से बचें। - डॉ. प्रियंका सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ