अमरोहा। जहां एक तरफ सरकार लोगों की सेहत को लेकर गंभीर है। अस्पतालों में नई-नई योजनाओं की सौहगात दी जा रही है। जिससे लोगों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके लेकिन लोगों की सेहत का देखभाल करने वाले ही कम होंगे तो फायदा कैसे मिलेगा। अगर हम जिला संयुक्त अस्पताल की बात करें तो यहां पर चिकित्सकों के 42 पद खाली है। दिल की धड़कन को देखने वाले कार्डियोलाॅजिस्ट की लंबे समय से दरकार है। हालांकि हर माह शासन से पत्राचार जरूर किया जाता है लेकिन समस्या का हल नहीं हो पाता।
वर्ष 1997 में अमरोहा को नया जिला घोषित किया गया था। जिससे लोगों को उम्मीद जगी कि अब स्वास्थ्य सेवा बेहतर होंगी। उसके साथ ही 200 बेड का जिला अस्पताल का निर्माण भी शुरु हुआ हालांकि सरकार ने लोगों की सेहत से जुड़ी काफी सुविधाओं को अस्पताल में दिया। चौबीस घंटे एंबुलेंस काम कर रही है। सीटी स्कैन से लेकर ब्लड बैंक तक है लेकिन जो लोगों की सेहत का ख्याल रख सकें उनकी ही कमी चल रही है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 67 पद स्वीकृत है लेकिन यहां पर 25 ही चिकित्सक ही काम कर रहे है। इस तरह 42 पद खाली चल रहे हैं। कार्डियोलॉजिस्ट चिकित्सक तो शुरु से ही नहीं मिला। इसके अलावा त्वचा, चेस्ट फिजिशियन और स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद पिछले पांच साल से खाली चल रहे हैं। गंभीर बीमारियों के मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 42 पद खाली हैं। इसके संबंध में हर माह शासन को पत्र भेजा जाता है। फरवरी में भी चिकित्सकों की डिमांड की गई है। लेकिन जो चिकित्सक अस्पताल में हैं। वह लोगों का उपचार कर रहे हैं। मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाती है। 100 बेड का पुरुष और 100 बेड का महिला अस्पताल है।
-डा. एके भंडारी, सीएमएस