तहसील के चार गांवों के करीब 250 परिवारों पर घर से बेघर व भूमिहीन होने का खतरा मंडरा रहा है। पिछले करीब 45 सालों से जिस भूमि पर वे लोग काबिज थे। उस भूमि को चकबंदी विभाग द्वारा झील के रूप में दर्ज कर दिया गया है। चकबंदी विभाग की इस कार्रवाई से 250 परिवारों के सदस्य भूमि से बेदखल होने की चिंता में डूबे हुए हैं। इन लोगों को उनका हक दिलाने के लिए भारतीय किसान यूनियन आगे आई है। कब्जेदारों का कहना है कि वे इस भूमि का लगान जमा करते आ रहे हैं।
वर्ष 1978 में आजमपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले चार गांवों आजमपुर, आशिकपुरा, पट्टी खादर व दांडी के करीब 250 लोगों को पट्टा आवंटित किया गया था। पट्टा होने पर लोगों ने वहां खेती शुरू कर दी और मकान भी बना लिए गए। राजस्व रिकार्ड में यह भूमि झील के नाम से दर्ज थी। अब आजमपुर गांव में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। चकबंदी विभाग ने पट्टे निरस्त करते हुए इस भूमि को झील के रूप में दर्ज कर दिया। राजस्व अभिलेखों में भूमि झील के नाम से दर्ज होने पर ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। उनको अपने घर से बेघर व भूमिहीन होने का खतरा सताने लगा है।
किसानों की परेशानी की जानकारी हुई है। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। राजीव तरारा भाजपा विधायक
क्षेत्र के सैकड़ों परिवार इस भूमि का लगान भी जमा कर रहे हैं। चकबंदी विभाग की इस प्रक्रिया से उनके बेघर होने का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन को इस संबंध में लोगों की वास्तविक परेशानी को समझना चाहिए। जसवंत सैनी, पूर्व ग्राम प्रधान दांडी करीब 40 सालों से हम लोग इस भूमि पर अपनी खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। पट्टे निरस्त कर वहां झील दर्ज कर देने से हजारों लोग सड़क पर आ जाएंगे। प्रशासन की यह कार्रवाई बेहद चिंताजनक है। ध्यान सिंह ग्राम आशिकपुरा
जिस दिन से हमारी भूमि को राजस्व रिकार्ड में झील दर्ज किए जाने की जानकारी मिली है। रात की नींद व दिन का चैन उड़ गया है।
नौ बीघा भूमि पर खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए। समरपाल सिंह ग्राम दांडी किसानों को उनकी जमीन से ऐसे ही उजाड़ने नहीं देंगे। 250 परिवारों के सामने घर से बेघर व भूमिहीन होने का खतरा हो गया है। इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ने के लिए किसान संगठन पूरी तरह तैयार हैं। -डूंगर सिंह, मंडल अध्यक्ष भाकियू असली