पोल खुलने के बाद कार्रवाई के डर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान की चौथी किस्त के नाम पर ली गई 18 हजार की रिश्वत पीड़ित को वापस दे दी गई।
नगर के मोहल्ला लक्ष्मी नगर मोहल्ला निवासी हाजरा के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उसे प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत मकान मिला है। जिसकी चौथी किस्त नहीं आई है। 50 हजार रुपये की चौथी किस्त नहीं आने के कारण निर्माण अधूरा है। हाजरा के आरोप के मुताबिक उसे आवास के लिए खासे पापड़ बेलने पड़े थे। पालिका के एक कर्मचारी और डूडा के एक अधिकारी समेत चार लोगों को 18 हजार रुपये की रिश्वत देनी पड़ी थी। उसने रिश्वत लेने वालों की पोल 24 मई को नगर पालिका जाकर तब खोली, जब उसकी चौथी किस्त नहीं आई। उसने बेखौफ होकर ईओ विजेंद्र सिंह पाल के सामने पालिका के कर्मचारी का नाम लेकर कहा था, इसने तीन हजार रुपये लिए और बाकी 15 हजार रुपये डूडा के अधिकारी सहित अन्य को दिलवाए। उसके पास रुपये का इंतजाम नहीं हुआ तो ब्याज पर लेकर आई थी। पालिका कर्मी सहित चार पर रिश्वत लेने का आरोप लगने पर ईओ भी अवाक रह गए थे। उन्होंने पालिका कर्मी को कार्रवाई की चेतावनी दी तो उसने तीन हजार रुपये खुद लेने और बाकी 15 हजार रुपये डूडा के एक अधिकारी सहित तीन लोगों द्वारा लिए जाने की बात कबूल की। जिसके बाद ईओ ने रुपये वापस नहीं करने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की रिपोर्ट दर्ज कराने और विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद हरकत में आए आरोपियों ने रिश्वत के रूप में लिए 18 हजार रुपये वापस किए। हाजरा का कहना है कि पालिका कर्मी ने घर जाकर रुपये लौटाए और डूडा के अधिकारी सहित अन्य ने उसके खाते में रुपये भेजे। हाजरा ने बताया कि वह हिम्मत से काम नहीं लेती और रिश्वत लेने वालों की पोल नहीं खोलती तो आरोपियों के हौसले बुलंद हो जाते। उसकी रकम भी वापस नहीं करते। आगे भी लोगों से रिश्वत लेते। इस तरह भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता।
आवास योजना के तहत सिर ढकने के लिए मकान पाने वाली हाजरा के शौहर वेल्डिंग का काम करते हैं। काम करते समय उनका हाथ मशीन में आ गया। जिसके उपचार पर इतना पर खर्च हुआ कि वह कर्जदार हो गईं। उधर मकान के लिए ब्याज पर लाकर 18 हजार रुपये की रिश्वत देने के कारण भी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। पानी के लिए नल तक नहीं लगवा सकी। अमर उजाला ने उसके मुद्दे को उठाया। जिसके कारण पालिका कर्मी और डूडा के अधिकारी को रुपये वापस करने पड़े। रुपये मिलने पर हाजरा बोली अमर अजाला को शुक्रिया। ईओ विजेंद्र सिंह पाल का कहना है कि हाजरा की ईमानदारी उसकी बातों से साफ झलकती है। वह चाहती तो रिश्वत में मोटी रकम बता सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। लोगों को उसकी ईमानदारी और साहस से सीख लेनी चाहिए।