दस सेमी घटा जलस्तर, शनिवार को 85 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा का जलस्तर पिलछे दो सप्ताह से 200 गेज मीटर के पार ठहरा हुआ है। इससे ओसीता जग्देपुर के जंगल में पानी भरा हुआ है। जानकारों की मानें तो जब तक जलस्तर 200 गेज मीटर से बीस सेमी नीचे नहीं खिसक जाता, तब तक बाढ़ का पानी फसलों से नहीं निकल पाएगा। बाढ़ का संकट अभी बरकरार है। किसानों की बेचैनी बढ़ रही है। पानी से घिरीं फसलों पर संकट मंडरा रहा है। बाढ़ चौकी पर तैनात अफसर जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।
पहाड़ों पर बरसात का सिलसिला जारी रहने से जलस्तर में उतार चढ़ाव हो रहा है। पिछले तीन दिन से पहाड़ों पर तेज बरसात नहीं हुई, तो इसका असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई दिया। तीन दिनों में गंगा के जलस्तर में पचास सेमी तक गिरावट इसी का नतीजा है। बावजूद इसके करीब दो सप्ताह से तिगरी गंगा का जलस्तर 200 गेज मीटर के पार ठहरा हुआ है। गंगा का जलस्तर 200 का आंकड़ा छूते ही ओसीता जग्देपुर के जंगल में लहलहा रही गन्ना व धान की फसलों में बाढ़ का पानी घुस गया था। जो आज तक खेतों में बना हुआ है। इससे जो फसलें बाढ़ के पानी की गिरफ्त में उन फलसों के नष्ट होने का संकट बहुत नजदीक दिखाई दे रहा है। यदि सप्ताह भर और पानी यूं ही फसलों में भरा रहा तो किसान करीब एक हजार से ज्यादा बीघा में लहलहा रही फसलों को नहीं बचा पाएंगे। बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। शनिवार को भी डैम से करीब 85 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इसका असर रविवार को देखा जा सकता है। शुक्रवार को दस सेमी की कमी होने पर यह ब्रजघाट में 200.20 व तिगरी में 200.40 गेज मीटर दर्ज किया गया था, जो शनिवार को ब्रजघाट में 200.00 व तिगरी में 200.30 गेज मीटर दर्ज किया गया। जबकि खतरे का निशान ब्रजघाट में 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर है। प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए लगातार तटबंधन का कार्य कराया जा रहा है।