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200.50 गेज मीटर पहुंचा जलस्तर, खादर क्षेत्र के किसानों में दहशत

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गुरुवार को 20 सेमी दर्ज की गई जलस्तर में बढ़ोत्तरी, छोड़ा गया 80 क्यूसेक पानी
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
पहाड़ी इलाकों में फिर शुरू हुई झमाझम बरसात और हरिद्वार व बिजनौर डैम से गंगा में लगातार छोड़े जा रहे पानी का असर मैदानी इलाकों में दिखाई दे रहा है। गुरुवार को जलस्तर में 20 सेमी की बढ़ोत्तरी होने से जलस्तर 200.50 पहुंच गया। इससे खादर क्षेत्र के किसानों में दहशत बढ़ गई है। बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ओसीता जग्देपुर के खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने से फसल नष्ट होने का संकट गहरा रहा है। किसानों को खेतों से चारा लाने में भी बहुत परेशानी हो रही है। हालांकि बाढ़ अफसर बढ़े जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
पहाड़ों पर लगातार तेज बरसात का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। इससे पहाड़ी इलाकों के बड़े जलाशयों में जमा हुए पानी को मैदानी इलाकों में छोड़ा जा रहा है। गुरुवार तड़के करीब अस्सी हजार क्यूसेक पानी डैम से छोड़ा गया। जिससे एक साथ गंगा का जलस्तर बहुत बढ़ गया। इससे गंगा, खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ती जा रही है। गंगा किनारे बसे खादर क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया। ओसीता जग्देपुर में पहले ही पानी पहुंच चुका है। गुरुवार को जलस्तर बीस सेमी और बढ़ने की सूचना से किसानों की बेचैनी और बढ़ गई।
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बुधवार को ब्रजघाट में 200 व तिगरी में 200.30 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था । जो गुरुवार को बढ़कर ब्रजघाट में 200.30 व तिगरी में 200.50 गेज मीटर हो गया। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से ब्रजघाट में 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से ज्यादा नीचे नहीं बची है। प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए लगातार तटबंधन का कार्य कराया जा रहा है।
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गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा किनारे बसे लोगों को अलर्ट किया जा चुका है। जलस्तर में अभी और भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है। लेकिन बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयारी की जा रही है।
- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ चौकी तिगरी।
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