गजरौला। जिले के लोगों को फलदार पेड़ों की पौध अब सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए राजकीय पौधशाला को फिर से चलाने की तैयारी हो गई है। दरअसल बजट के अभाव में सालों पहले पौधशाला को बंद कर दिया गया था। इससे निजी नर्सरी से लोग महंगी पौध खरीदने के लिए मजबूर थे।
उद्यान विभाग ने हाल में ही प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है जिसमें राजकीय पौधशाला को फिर से चालू करने के लिए बजट की डिमांड की गई है। सूत्रों की मानें तो बजट जल्द ही मिल जाएगा जिससे नर्सरी में फलदार पेड़ों की पौध बनाई जा सकेगी। ढक्का गांव में राजकीय पौधशाला से पहले से ही मौजूद थी लेकिन, पैसा नहीं मिलने के कारण इसे बंद कर दिया गया है। पौध का उत्पादन भी नहीं हुआ।
जिलेभर में वन विभाग की कई नर्सरी हैं जिनसे लोगों और किसानों को आसानी से पौध उपलब्ध हो जाती है लेकिन, वन विभाग की नर्सरी में फलदार पौध का उत्पादन नहीं किया जाता। ऐसे में लोग निजी नर्सरी पर निर्भर हो गए थे। वहां से महंगी दरों पर पौध खरीदनी पड़ती थी। इसका सीधा असर पौधारोपण पर भी हुआ। लोगों ने फलदार पौधे लगाने ही बंद कर दिए। इक्का-दुक्का लोगों ने ही फलदार पौधों का रोपण किया। वैसे तो तमाम अभियान पौधारोपण के लिए चलाए जाते हैं। इनमें यह कहना मुश्किल होगा कि कितने पौधे फलदार लगाए गए। उद्यान विभाग का मानना है कि जब पर्याप्त मात्रा में फलदार पौध उपलब्ध होगी और बहुत कम कीमत पर। इससे फलदार पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा।
ढक्का गांव में राजकीय पौधशाला को फिर से शुरू करने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद है जिससे राजकीय पौधशाला में फलदार पौध का उत्पादन शुरू हो जाएगा। सुभाषचंद्र, जिला उद्यान अधिकारी।