अमरोहा। त्योहार शुरू होते ही मिलावट खोर भी सक्रिय हो जाते हैं। खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सरकारी इंतजाम भी नहीं हैं। सिस्टम की बेइंतजामी से लोग जहर खाने पर मजबूर हैं। पिछले साल अप्रैल से सितंबर तक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 134 नमूने लिए, जिनमें से 102 सैंपल फेल आए हैं। नमकीन, मावा, पनीर, घी, तेल, रिफाइंड, मिठाई, चिप्स, पापड़ सभी में मिलावट पाई गई। होली पर मिठाई संग नमकीन का स्वाद भी संभल कर ही चखें। बेसन में जहां मक्का के आटे की मिलावट की जा रही है तो वहीं अन्य खाद्य पदार्थों में भी मिलावट का तड़का लगाया जा रहा है। मिलावटी खाद्य पदार्थ सस्ते दामों पर खुलेआम बेचे जा रहे हैं।
हालत ये है कि बाजार में बिक रहे सामान में मिलावट की पहचान तक कर पाना मुश्किल है। चिकित्सक सेहत के प्रति आम लोगों को जागरूक कर गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की ही नसीहत दे रहे हैं।
खाद विशेषज्ञों की राय
खाद्य विशेषज्ञों के मुताबिक सिंथेटिक मावा बनाने में दूध की जगह दूध पाउडर, रसायन, आलू, शकरकंद, रिफाइंड तेल जबकि सिंथेटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जेंट पाउडर, तरल जैल, रिफाइंड व मोबिल आयल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोख्ता कागज डाला जाता है। इससे सिंथेटिक दूध व मावे के साथ ही पनीर भी तैयार किया जा सकता है। सिंथेटिक मावे की पहचान आयोडीन जांच या फिर चखकर उसके स्वाद व रंग से की जा सकती है। इसका स्वाद व रंग सामान्य से भिन्न कुछ खराब होता है।
त्योहारों पर खाद्य पदार्थों की मिलावट रोकने के लिए कार्रवाई की जाती है। पिछले अप्रैल से लेकर सितंबर तक 134 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे जिनमें से 102 फेल हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में न्यायालय के माध्यम से 130 लोगों से 50 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
-सुनील कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
ऐसे करें असली और नकली की पहचान
. मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें। अगर ये पानी छोड़े तो नकली है।
. मावा को अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। असली मावे से घी की महक आएगी।
. मावा की गोली बनाएं। अगर ये गोली फटने लगे तो समझें मावा नकली।
. असली मावा मुंह में चिपकता नहीं है जबकि नकली मावा चिपक जाएगा।
. असली मावे खाने से मुंह में कच्चे दूध जैसा स्वाद आता है।
. 6.2 ग्राम मावा का 5 एमएल गरम पानी में घोल लें और ठंडा होने दें।
. ठंडा होने के बाद इसमें टिंचर आयोडीन डालें
. मावा नकली होगा तो इसका रंग नीला हो जाएगा।
कैसे करें खोवा में मिलावट की पहचान
क्या कहते हैं डॉक्टर
सीएमओ डॉ. राजीव सिंघल कहते हैं कि मिलावटी या नकली मावा सबसे पहले हमारे लीवर को प्रभावित करता है। ऐसे मावे से बनी मिठाइयों का सेवन करने से पेट खराब हो सकता है। पाचन क्रिया प्रभावित होती है।
होली पर गुझिया खाने की परंपरा
होली को देखते हुए गुझियों का बाजार भी सज गया है। मिठाई कारोबारियों ने तरह-तरह की गुझियां तैयार की हैं। केसर, काजू, पिस्ता के साथ ही चंद्रकला, फाल्गुनी गुझिया की भी बाजार में भरमार है। इसके अलावा चॉकलेट और शहद की भी गुझिया तैयार की गई है। लेकिन ये गुझिया कितनी शुद्ध होंगी इसका अंदाजा लगाया जाना मुश्किल है।