दहेज हत्या के मामले में न्यायालय ने पति को दस और ससुर को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पिता-पुत्र पर 14 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। गिरफ्तारी के बाद से हत्यारोपी पति जेल में बंद था। फैसला आने के बाद जमानत पर बाहर ससुर को भी कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।
यह घटना आदमपुर थानाक्षेत्र के ढवारसी गांव में हुई थी। मुरादाबाद जनपद के हरथला विद्यानगर निवासी मुन्ने खां की बेटी शमा परवीन की शादी वर्ष 2016 में आदमपुर थानाक्षेत्र के ढबारसी गांव निवासी वसीम के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले शमा परवीन को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। दहेज में दो लाख रुपये की मांग करते थे। विरोध करने पर शारीरिक और मानसिक रूप से उत्पीड़न करते थे। 12 अप्रैल 2018 कि सुबह करीब दस बसे बजे शमा परवीन की मौत हो गई। विवाहिता के मायके वालों ने जहर देकर हत्या करने का आरोप लगाया था। इसके बाद विवाहिता के पिता मुन्ने खां ने पति वसीम, ससुर निजामुद्दीन और एक ननद के खिलाफ दहेज हत्या के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि नाबालिग ननद को बाल सुधार गृह भेजा था। फिलहाल आरोपी निजामुद्दीन और नाबालिग ननद जमानत पर बाहर थे। वहीं काफी प्रयास करने के बाद भी हत्यारोपी पति को जमानत नहीं मिल सकी थी। यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय प्रथम निशांत शैव्य की अदालत में विचाराधीन चल रहा था।
शुक्रवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार ने पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी पिता-पुत्र को दोषी करार दिया। जिसमें पति वसीम को 10 साल और ससुर निजामुद्दीन को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों दोषियों पर 14 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक, नाबालिग ननद से संबंधित मुकदमा बाल न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है।