अमेठी। कोतवाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोरारी गिरधरशाह के पीठीपुर गांव में बुधवार को मवेशी चराने गया किशोर तालाब में नहाने लगे। पानी अधिक होने से डूब रहे किशोर को बचाने में तालाब में कूदे युवक की भी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कोतवाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोरारी गिरधरशाह के पूरे अगवान गांव निवासी अवंत कुमार मिश्र का 13 वर्षीय पुत्र रुद्रांश उर्फ गोपाल और सूबेचंद कोरी का 20 वर्षीय पुत्र आशीष बुधवार को मवेशियों को चराने पीठीपुर गांव के बाहर खेत में गए थे। साथ में गांव के आदित्य (17) पुत्र गुदून, अंशु (15) आदि बच्चे भी अपने मवेशियों को चराने ले गए थे।
पीठीपुर गांव स्थित बिजली उपकेंद्र मोड़ के पास अमृत सरोवर तालाब रुद्रांश और आदित्य नहाने लगे। तालाब में पानी अधिक होने से दोनों डूबने लगे। उनको बचाने के लिए आशीष ने तालाब में छलांग लगा दी। उसने आदित्य को बचा लिया। लेकिन, रुद्रांश को बचाते समय दोनों गहरे पानी में चले गए और डूब गए। मौजूद बच्चों के शोर मचाने पर गांव के लोग तालाब के पास पहुंचे।
ग्रामीण कल्लू शुक्ला, हनुमान तिवारी सहित कई लोग दोनों को निकालने के लिए तालाब में कूदे और काफी प्रयास के बाद रुद्रांश और आशीष को तालाब से बाहर निकाला। दोनों को सीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया जा रहा है।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार तालाब में करीब पांच बच्चे नहा रहे थे। जिसमें तीन बच्चे सुरक्षित हैं। आशीष बचाने के प्रयास में रुद्रांश और आशीष दोनों डूब गए, जिसमें दोनों की मौत हो गई। शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा रहा है।
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भाई बहनों में सबसे छोटा था रुद्रांश
- पूरे अगवान गांव निवासी अवंत कुमार मिश्र दिल्ली में रह कर नौकरी करते हैं। अवंत कुमार के दो बेटी खुशी (20), रुचि (18) तथा दो बेटे कान्हा (14) तथा सबसे छोटा मृतक रुद्रांश (13) था। घटना के बाद मौके पर पहुंची मां शशि मिश्रा, भाई कान्हा, चाचा अजय तिवारी का रो-रो कर बुरा बुरा हाल है। दूसरे मृतक आशीष कोरी तीन भाइयों में सबसे छोटा था। मृतक अविवाहित था। घटना के बाद पिता सूबे चंद्र कोरी, मां कलावती, बड़े भाई सुनील बिलख-बिलख कर रो रहे थे।
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जान पर खेल आदित्य बचाई जिंदगी
- अब जब आशीष हमारे बीच नहीं है लेकिन, उसने अपनी जान पर खेलकर आदित्य की जिंदगी बचा ली। मौके एकत्र लोग आशीष के साहस की चर्चा कर रहे थे। उनकी आंखें नम थी। वैसे अमृत सरोवर में करीब एक सप्ताह पहले मवेशियों के लिए पानी भरवाया गया था।