बाजारशुकुल (अमेठी)। निष्ठा, लगन व भक्ति से किया गया कोई कार्य कभी व्यर्थ नहीं होता। प्रभु को निष्ठावान लोग अति प्रिय हैं। ये बातें क्षेत्र के पारा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन प्रवाचक देवी राधिके ने कहीं।
प्रवाचिका ने हनुमानजी की निष्ठा, लगन, भक्ति की व्याख्या विस्तार से करते हुए कहा कि प्रभु को निष्ठावान व्यक्ति अति प्रिय हैं। बताया कि जैसे श्रीरघुनाथजी के बाण अमोघ हैं, वैसे हनुमानजी के कार्य और लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में प्रयत्न भी अमोघ होता है। वीर हनुमान ने सीता की खोज ही नहीं की, बल्कि वानर-भालुओं के प्राणों की रक्षा भी की। उन्होंने कहा कि वनवास के दौरान लंका का राजा रावण माता सीता का हरण कर ले गया। सुग्रीव की सहायता से माता सीता की खोज में वानर दल चारों दिशाओं में भेजे गए।
दक्षिण की ओर जामवंत, हनुमान और अंगद को भेजा गया। समुद्र को लांघने में कोई समर्थ नहीं रहा तो यह कार्य हनुमान ने किया। लंका में पहुंचकर विभीषण से भेंट, माता सीता के पास अशोक वाटिका पहुंचना, वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार का वध, लंका दहन समेत अन्य प्रसंग सुनाए। इस मौके पर ओमकृष्ण तिवारी, शिवांशु मिश्रा, विमलेश तिवारी, अतुल तिवारी, सुभाष तिवारी, मनोज, सोनू आदि मौजूद रहे।