प्रार्थना सभा की आड़ में जगदीशपुर में चल रही धर्मांतरण की कोशिश की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। पूछताछ में सोमवार को पता चला कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को बेटी की शादी में मदद व भूत-प्रेत से मुक्ति के नाम पर बुलाया जा रहा था। यह खेल करीब आठ वर्ष से चल रहा था। यहां आने वाली महिलाओं को पशुपालन में भी मदद का भरोसा दिया जा रहा था।
मुख्य आरोपी आरोपी किशोर कुमार ने बताया कि वह यहां पिछले आठ वर्ष से रहता है। लोगों को एकत्रित करने का काम दो वर्ष से कर रहा है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंड एंटीकरप्शन आर्गनाइजेशन स्वैच्छिक संगठन अमेठी का अध्यक्ष है। प्यारी बेटी शगुन योजना के तहत पंजीयन के दौरान बच्चियों के नाम से एक हजार रुपये जमा कराए जाते हैं। एक वर्ष बाद शादी करने पर 11 हजार, दो वर्ष पर 21 हजार, पांच वर्ष पर 51 हजार और 10 वर्ष के बाद कभी भी शादी करने पर 1,25,000 रुपये शगुन के रूप में सहयोग राशि संस्थान की ओर से दी जाती है।
रविवार को स्थानीय कस्बे में धर्मांतरण की कोशिश चल रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार थाने से चंद कदम की दूरी पर ही पूरा खेल चल रहा था। आसपास के गांवों व जिले के लोगों का हर रविवार प्रार्थना सभा के नाम पर जमावड़ा होता था। प्रार्थना सभा में आई महिलाएं व बच्चों को इस कदर बरगलाया गया था कि वे कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थे। महिलाएं सवालों के जवाब में बस इतना ही कह रही थीं कि उन्हें बेटी की शादी के लिए आवेदन फार्म भरने और सरकार से मिलने वाले शादी अनुदान के लिए बुलाया गया था। कुछ ने प्रेत बाधा के समाधान के लिए प्रार्थना सभा में आने की बात कही।
बाराबंकी जिले से आई किशोरी प्रार्थना सभा के प्रति मुखर दिखी। वहीं की किशोरियों व महिलाओं ने बताया कि लड़की की शादी के लिए फार्म भरने के बाद एक लाख रुपये मिलेंगे। इसी प्रलोभन में आवेदन के लिए आई थीं। स्थानीय जिले की शुकुलबाजार से आई महिला ने बताया कि बेटी की शादी का फार्म भरने के लिए पहली बार आई है।
गोंडा जिले की महिला ने प्रार्थना सभा के प्रति अपनी आस्था जताई। उसने दावा किया कि प्रार्थना में शामिल होने से दुख दूर होते हैं। जगदीशपुर क्षेत्र निवासी बुजुर्ग ने बताया कि भगवान में आस्था है। अन्य सवाल के जवाब में कान से कम सुनाई देने की बात कही। शंकरगंज से बेटी के साथ आई महिला ने बताया कि लड़की की शादी में आर्थिक मदद का भरोसा दिया गया था। इसीलिए हर प्रार्थना सभा में शामिल हो रही थी।
ऑनलाइन मंगाया जाता है धर्म ग्रंथ
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रत्येक रविवार को प्रार्थना सभा होती थी, जिसमें अन्य धर्म व समुदाय के लोग झोले में ग्रंथ लेकर पहुंचते हैं। सुबह से शुरू हुआ प्रार्थना का क्रम शाम तक चलता था।
धर्म प्रतीक चिह्न के रूप में लगी एलईडी लाइट
धर्मांतरण का खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा था। घर के अंदर चलने वाले खेल की जानकारी किसी को नहीं हो पाती थी। घर के बाहर संबंधित धर्म का प्रतीक चिह्न भी सांकेतिक रूप से एलईडी लाइट के साथ लगाया गया था। रविवार को कोठी पालपुर स्थित हनुमान मंदिर के पुजारी अश्वनी पांडेय की तहरीर पर छह के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। सोमवार को नामजद किशोर कुमार सहित अन्य महिलाओं का चालान कर न्यायालय में भेजा। प्रभारी निरीक्षक धीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि मामले में जांच कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।